बुधवार, 02 नवंबर, 2005 को 02:34 GMT तक के समाचार
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रमेशचंद्र लाहौटी ने कहा है कि भारत में आतंकवाद का सामना करने के लिए राजनीतिक इच्छाशाक्ति नहीं है.
अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने पत्रकारों से कहा कि आतंकवादी घटनाओं की जाँच के लिए नए क़ानून और तरीकों की ज़रूरत है लेकिन कोई इस समस्या का भारत में गंभीरता अध्ययन नहीं करता.
भारत के क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश का बयान सुना है.
उनका कहना था, "भारत कुशलतापूर्वक आतंकवाद के साथ जूझ रहा है और क़ानून भी बनाए गए हैं, जिनका पूर्व मुख्य न्यायाधीश को पता है."
उन्होंने कहा, "हमारे सभ्य क़ानून हैं, ऐसे नहीं जो जनता और मानवाधिकारों के विरुद्ध हों. हम लोकतांत्रिक समाज हैं और पूर्व मुख्य न्यायाधीश को भी इसका ज्ञान होना चाहिए."
राजनीतिक इच्छाशक्ति न होने की बात पर भारद्वाज ने कहा कि ये ग़लत बयान है.
उन्होंने पलटकर सवाल किया, "राजनीतिक इच्छा शक्ति का क्या मतलब होता है? इसका मतलब ये होता है कि जितने उपाय करने चाहिए वो किए जाएँ. आज बहुत सारे लोग समझते हैं कि अल्पसंख्यक समुदायों को दबा दो तो उससे राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखती है लेकिन हम भाजपा की तरह नहीं सोचते."
अमरीका के साथ तुलना किए जाने पर भारत के क़ानून मंत्री का कहना था कि दोनो अलग देश हैं और भारत किसी की नकल नहीं करता. उनका कहना था कि भारत और अमरीका अलग-अलग समाज हैं और हालात में भी काफ़ी अंतर है.
भारद्वाज का कहना था कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था.
रमेशचंद्र लाहौटी के सेवानिवृत होने के बाद न्यायाधीश वाईके सभरवाल भारत के मुख्य न्यायाधीश बन गए हैं.