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मंगलवार, 01 नवंबर, 2005 को 08:28 GMT तक के समाचार

शालिनी जोशी
देहरादून से

टिहरी में रुकी भागीरथी की धारा

उत्तरांचल में टिहरी बांध की आखिरी सुरंग को बंद कर पहली बार भागीरथी का अविरल प्रवाह रोक दिया गया है जिससे बांध के जलाशय में पानी भरना शुरू हो गया है.

बांध से विस्थापित होने वाले लोग अब भी यहाँ अपने अधिकारों की आख़िरी लड़ाई लड़ रहे हैं और उनका कहना है कि या तो उनका समुचित पुनर्वास किया जाए और या फिर वो जलसमाधि ले लेंगे.

बांध से तैयार होने वाली 42वर्ग किलोमीटर की झील में न केवल टिहरी शहर बल्कि आसपास के 48 गांव जलमग्न हो रहे हैं.

टिहरी में अब एक करुणा भरा दृश्य है. एक तरफ़ जहाँ विज्ञान और तकनीक के चमत्कार से तेज़ प्रवाह वाली भागीरथी नदी की अविरल धारा रोक दी गई है वहीं 4 मीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चढ़ रहा झील का पानी टिहरी शहर और पास के गाँवों को तेज़ी से अपनी आगोश में लेता जा रहा है.

इसमें उन लोगों की व्यथा और संवेदना हिलोरें ले रही हैं जो यहाँ की गलियों और खेत-खलिहानों में खेल-कूद कर बड़े हुए.

टिहरी में भागीरथी और भिलंगना के संगम पर एशिया का सबसे ऊँचा बाँध बन रहा है जिससे 24 हज़ार मेगावाट बिजली पैदा होगी.

इससे क़रीब सवा लाख लोगों को अपनी-अपनी जगहों से विस्थापित होना पड़ रहा है.

अब तक नैनीताल उच्च न्यायालय ने टिहरी बांध की आखिरी सुरंग संख्या-2 को बंद किए जाने पर रोक लगा रखी थी.

न्यायलय ने कहा था कि जब तक अंतिम आदमी का पुनर्वास नहीं हो जाता तब तक बांध के जलाशय में पानी भरने की इजाज़त नहीं दी जा सकती लेकिन अदालत से अनुमति मिलने के बाद रविवार को आनन-फानन में सुरंग को बंद कर दिया गया है जिससे भागीरथी का प्रवाह पूरी तरह से रुक गया है.

विरोध

अदालत के इस फैसले और टिहरी पनबिजली निगम के सुरंग को बंद कर दिए जाने के ख़िलाफ़ विस्थापितों में भारी आक्रोश है और जगह-जगह लोग धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं.

आनेवाले दिनों में लोगों का यह विरोध एक बड़े आंदेलन की शक्ल भी अख्तियार कर सकता है.

सिरईं गांव की सुमति देवी कहती हैं, "हम कहीं नहीं जाएंगे, जब तक हमारे पुनर्वास का समाधान नहीं किया जाएगा. भले ही हमें डूबना ही क्यों न पड़े."

टिहरी में माटू संस्था के महिपाल सिंह नेगी कहते हैं, "ग्रामीणों के साथ अन्याय हो रहा है, टिहरी शहर में तो फिर भी कुछ हद तक पुनर्वास हुआ लेकिन गाँव के विस्थापितों का समुचित पुनर्वास नहीं हो पाया. हम अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे."

उधर प्रशासन और टिहरी पनबिजली निगम काफ़ी उत्साहित है जिनका दावा है कि अब जल्दी ही बांध से बिजली पैदा होने का काम शुरू हो जाएगा.

टिहरी के ज़िलाधिकारी संजय कुमार कहते हैं, "जिस रफ़्तार से पानी चढ़ रहा है, उसे देखते हुए अगले वर्ष फरवरी तक समुद्र तल से 760 मीटर ऊँची झील तैयार हो जाएगी और बांध के पहले चरण में बिजली पैदा होने लगेगी."

उनका कहना है कि इस जल-स्तर तक पुनर्वास की सभी शिकायतें सुलझा ली गई हैं और अगर कोई और मामला बचता भी है तो उसे सुलझा लिया जाएगा.