मंगलवार, 01 नवंबर, 2005 को 08:20 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दिल्ली में 29 अक्तूबर को हुए तीन बम धमाकों की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इन धमाकों के पीछे जिनका भी हाथ है उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाना ज़रूरी है.
सुरक्षा परिषद ने अपने सभी सदस्य देशों से कहा है कि वे बम धमाकों के ज़िम्मेदार लोगों को पकड़ने के लिए भारत को सक्रिय सहयोग दें.
सुरक्षा परिषद ने एक बयान में कहा है, "आतंकवाद चाहे किसी भी रूप में हो, उससे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और शांति को ख़तरा पैदा होता है और आतंकवादी गतिविधियाँ एक अपराध हैं और उन्हें न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता."
बयान में कहा गया है, "सुरक्षा परिषद हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने वालों, उन्हें वित्तीय और अन्य तरह की मदद करने वालों को न्याय के कटघरे में लाने की महत्ता पर ज़ोर देती है."
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इससे पहले भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से कहा था कि बम धमाकों में शामिल लोगों के तार विदेशी संपर्कों तक जाते हैं.
प्रधानमंत्री ने परवेज़ मुशर्रफ़ से यह भी कहा कि वे भारत के ख़िलाफ़ होने वाली चरमपंथी गतिविधियों को रोकने के लिए काम करें.
ग़ौरतलब है कि शनिवार को हुए उन बम धमाकों में 60 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई और 200 से ज़्यादा घायल हो गए.
इनमें से दो बम धमाके व्यस्त बाज़ारों में हुए और उस समय बाज़ार में ख़रीदारों की भारी भीड़ जमा थी.
अख़बारों में भारतीय लोगों की हिम्मत की दाद देते हुए कहा है कि बम धमाकों के बावजूद लोगों में जीने की दृढ़ इच्छा और त्यौहार मनाने के संकल्प में कोई फ़र्क नहीं आया है और दिल्ली के लोग इसी संस्कृति के लिए मशहूर हैं.
दिल्ली में बीबीसी संवाददाता माइक वुलरिज का कहना है कि चूँकि दीवाली को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है इसलिए इस साल बहुत से लोग इस प्रकाश पर्व को कुछ अलग ही भावना के साथ मनाएंगे.
लेकिन इस भावना के बावजूद लोगों में बाज़ारों में कुछ दहशत ज़रूर नज़र आई है और जगह-जगह सुरक्षा भी बढ़ाई गई है.
सरकार का कहना है कि ये बम धमाके न सिर्फ़ हिंदुओं के त्यौहार दीवाली बल्कि मुसलमानों के त्यौहार ईद के माहौल में भंग डालने के इरादे से किए गए हैं.
पुलिस का कहना है कि इन धमाकों के ज़िम्मेदार लोगों की तलाश में व्यापक अभियान चलाया गया है.