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रविवार, 30 अक्तूबर, 2005 को 10:57 GMT तक के समाचार

आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

धमाकों से दहल गई दिल्ली

दिल्ली के विस्फोटों को राजधानी के सभी समाचारपत्रों ने प्रमुखता से छापा है और सभी इससे संबंधित ख़बरों से भरे हुए हैं. ज़्यादातर अख़बारों की सुर्खी है कि इन धमाकों से दिल्ली दहल उठी.

नवभारत टाइम्स की सुर्खी है कि धमाकों से दहल उठी दिल्ली. अस्पतालों में रहा अफ़रातफ़री का माहौल.

अख़बार लिखता है कि सफ़दरजंग अस्पताल के बर्न वार्ड में घुसते हुए माँस के जलने की गंध का अहसास होता है. बर्न वार्ड के प्रवेश द्वार के पास से ही खून व जले हुए चमड़े के निशान साफ़ नज़र आते हैं.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की हेडलाइन है-टेरर डार्कन्स दिवाली, ईद यानी आतंकवाद की दीवाली और ईद पर काली छाया.

अख़बार लिखता है कि दिल्ली में हुए विस्फोटों के पीछे लश्कर का हाथ होने का संदेह है.

दैनिक जागरण का शीर्षक है-बौखलाए आतंकवादियों का दिल्ली पर क़हर. अख़बार लिखता है कि दीवाली और ईद की तैयारियों में जुटे राजधानीवासियों के लिए 29 अक्टूबर की शाम काला शनिवार बनकर आई.

अख़बार का कहना है कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ख़बर सही रही लेकिन पुलिस के प्रबंध नाकाम रहे.

अमर उजाला ने ख़बर लगाई है कि दिल्ली धमाकों से दहली, 55 मरे. अख़बार लिखता है कि लेडी हार्डिंग अस्पताल आनेवाली हर एंबुलेंस लाश लेकर आ रही थी.

हिंदुस्तान का शीर्षक है- विस्फोटों से दहली दिल्ली. दौरा छोड़ लौटे मनमोहन. अख़बार लिखता है कि दिल्ली पर एक बार फिर आतंक का साया छा गया है.

राष्ट्रीय सहारा की सुर्खी है- धमाकों से दहली दिल्ली, 70 मरे. सहारा लिखता है कि पहाड़गंज में धुँआ छंटा तो दिखा मौत का मंज़र और सरोजनीनगर में धू-धू कर जल रहे थे लोग.

अख़बार लिखता है कि बाज़ार हुए सुनसान, पुलिस व नेता परेशान.

पंजाब केसरी लिखता है कि दीवाली के दिए जलने से पहले ही कई घरों के चिराग बुझ गए. पुलिस के हाथ-पांव फूले गए और चारों ओर दहशत का माहौल था.

अंग्रेज़ी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स की हेंडिग है- दिल्ली,29/10. अख़बार लिखता है कि यह दिल्ली पर हुआ सबसे बड़ा हमला है.

वीडियो रिपोर्ट: हमले के एक दिन बाद दिल्ली

धमाकों से जुड़ी तस्वीरें