सोमवार, 31 अक्तूबर, 2005 को 03:09 GMT तक के समाचार
पाणिनी आनंद
दिल्ली से
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि शनिवार को हुए विस्फ़ोटों में घायल हुए लोगों के इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.
प्रधानमंत्री रविवार शाम को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल पहुँचे जहाँ बड़ी संख्या में धायलों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है.
कैबिनेट की बैठक के ठीक बाद प्रधानमंत्री अस्पताल पहुँचे और वहाँ उन्होंने मरीज़ॉं से मुलाक़ात की.
प्रधानमंत्री ने बाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा, "हम सभी घायलों, उनके परिजनों और देशभर के लोगों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि सरकार उनके जीवन को सामान्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी."
उन्होंने कहा, "लोगों के इलाज का ख़र्च चिंता का विषय नहीं है. लोगों की ज़िंदगी ज़्यादा क़ीमती है."
नाराज़ परिजन
इसके बाद प्रधानमंत्री जैसे ही अपनी गाड़ी की ओर बढ़े, वहाँ इकट्ठा घायलों के परिजनों ने प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नारे लगाने शुरू कर दिए.
इसपर प्रधानमंत्री सुरक्षा घेरा तोड़कर लोगों की ओर लपके और उनकी बात सुनी.
लोगों की शिकायत थी कि तमाम वीआईपी लोगों के लगातार अस्पताल आते रहने से घायलों और उनके परिजनों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
इससे पहले लोगों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रामदॉस का भी घेराव किया और उनके सामने अस्पताल में लोगों को हो रही परेशानियों का ज़िक्र किया.
अस्पताल में भर्ती घायलों के परिजनों में से एक ने बताया, "यहाँ लगातार नेताओं का आना-जाना लगा है और इसके चलते हमें बार-बार वॉर्ड से बाहर निकाल दिया जा रहा है और हम अपने घायल परिजनों से नहीं मिल पा रहे हैं. बाहर न तो बैठने की जगह है और न ही पीने को पानी."
स्वास्थ्य मंत्री ने इस बारे में बीबीसी का बताया, "यहाँ कोई कुव्यवस्था नहीं है. हम लोगों को हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध करा रहे हैं. प्रधानमंत्री के दौरे से इन लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी."
पर जब उनसे मैंने पूछा कि क्या कारण है कि अभी तक लोगों को उनके परिजनों का पता नहीं लग पा रहा है, इसपर उन्होंने कहा कि इस दिशा में काम कर रहे हैं.
उन्होंने लोगों के सामने ही अस्पताल के तमाम आला अधिकारियों को निर्देश दिए कि लोगों के लिए तुरंत पानी और बाक़ी ज़रूरतों का बंदोबस्त किया जाए.
कितने ही लोग अभी भी इस अस्पताल परिसर में मृतकों या अपने घायल परिजनों को खोजने और उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं पर कई लोगों को इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं दी गई है.
इसके चलते लोगों में अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन के प्रति ख़ासा रोष व्याप्त है.