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नेपाल में मीडिया क़ानून का विरोध

नेपाल में शुक्रवार को आयोजित हड़ताल के कारण राजधानी काठमांडू में सामान्य जनजीवन अस्तव्यस्त रहा.

विपक्षी सात दलों के गठबंधन ने नए मीडिया क़ानून के विरोध में इस हड़ताल का आह्ववान किया था.

विपक्ष का कहना है कि यह क़ानून मीडिया की स्वतंत्रता पर निशाना है.

हड़ताल के कारण स्कूल, कॉलेज और बाज़ार बंद रहे और वाहनों की आवाजाही भी कम रही. हड़ताल के समर्थन में विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली.

दूसरी ओर काठमांडू में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था. विपक्ष का कहना है कि पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ़्तार भी किया है.

यह हड़ताल नए मीडिया क़ानून के तहत नेपाल के प्रमुख एफ़एम रेडियो स्टेशन कांतिपुर एफ़एम को बंद करने के विरोध में आयोजित की गई थी.

इस क़ानून को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है जिसकी सुनवाई रविवार को होनी है.

नए मीडिया क़ानून के तहत निजी एफ़एम रेडियो स्टेशनों पर समाचार प्रसारण करने पर पाबंदी लगाई गई है.

इसके तहत नेपाल नरेश और राजपरिवार के अन्य लोगों की आलोचना पर भी प्रतिबंध है.

छापा

इसके पहले 21 अक्टूबर को देर रात सरकार ने एफ़एम कार्यालय पर छापा मारा था और प्रसारण से संबंधित तमाम ज़रूरी उपकरण ज़ब्त कर लिए थे.

कांतीपुर एफ़एम रेडियो ने नेपाल सरकार पर आरोप लगाते हुए उनके इस क़दम को प्रेस की स्वतंत्रता पर कुठाराघात बताया था.

इसी महीने की शुरुआत में नेपाल सरकार की ओर से एक नया प्रेस क़ानून बनाए जाने के बाद इस तरह का यह पहला मामला है.

उधर नेपाल सरकार का कहना है कि यह क़ानून मीडिया को अधिक गंभीर और ज़िम्मेदार बनाने के लिए लागू किया गया है.

यह क़ानून राजा ज्ञानेंद्र द्वारा सत्ता अपने हाथों में लेने के आठ महीने बाद आया है.