गुरुवार, 27 अक्तूबर, 2005 को 20:50 GMT तक के समाचार
भारत में अधिकारियों का कहना है कि तमिलनाडु और कर्नाटक में पिछले पाँच दिन में भीषण वर्षा के कारण सौ से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.
हज़ारों लोग विस्थापित हुए हैं और कई क्षेत्रों में बाढ़ आ गई है.
कई ज़िलों में भारी बारिश के कारण जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है और रेल, सड़क और विमान यातायात प्रभावित हुआ है.
बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण भारत के पूर्वी तट पर समुद्री तूफ़ान आने की चेतावनी दी जा चुकी है.
तमिलनाडु में ग्यारह ज़िले प्रभावित हैं और साठ लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.
वहाँ सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं और सरकारी स्कूलों में अस्थायी राहत शिविर लगाए गए हैं.
उत्तरी चेन्नई के कई इलाकों में घुटनों-घुटनों तक पानी भरा हुआ है.
चेन्नई में चार हज़ार से अधिक लोगों को निचले इलाक़ों से हटाया गया है.
तूफ़ान का ख़तरा
उड़ीसा के तटीय इलाक़ों में चेतावनी जारी कर दी गई है.
पांडिचेरी से भी बुधवार रात से लगातार बारिश की ख़बरें आ रही हैं.
वहाँ भी प्रशासन ने सभी शिक्षण संस्थानों में छुट्टी की घोषणा कर दी है.
बंगाल की खाड़ी में तट से 700 किलोमीटर दूर कम दबाव का क्षेत्र बन रहा है.
मौसम विभाग का कहना है कि कम दबाव का यह क्षेत्र तूफ़ान में तब्दील हो सकता है.
इससे उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के तटीय इलाक़े प्रभावित हो सकते हैं.
ग़ौरतलब है कि 1999 में उड़ीसा में एक बड़ा तूफ़ान आया था.
कर्नाटक में 40 मरे
उधर कर्नाटक में भारी बारिश के कारण कावेरी नदी में बाढ़ आ गई है और वहाँ चालीस लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.
मांड्या ज़िला सबसे ज़्यादा प्रभावित है और वहाँ खड़ी फ़सल नष्ट हो गई है.
कर्नाटक के शहर बंगलौर में भी घुटनों तक पानी जमा है और लोगों को भारी दिक़्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
पिछले दिनों की बारिश के बाद सेना के इंजीनियरों को पानी में फँसे लोगों को निकालने के लिए बुलाना पड़ा था.
शहर के कई इलाक़ों में बिजली सप्लाई ठप है और पीने का पानी उपलब्ध नहीं है.
कर्नाटक के मुख्यमंत्री धर्म सिंह ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है और सड़कों और बाँधों की मरम्मत के लिए पाँच अरब रूपए की सहायता माँगी है.