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गुरुवार, 27 अक्तूबर, 2005 को 03:17 GMT तक के समाचार

सुनील रामन
बंगलौर से बीबीसी संवाददाता

भारी बारिश से बेहाल बंगलौर

भारत में सूचना क्रांति के केंद्र बंगलौर में बड़ी कंपनियाँ हमेशा ही बुनियादी सुविधाओं की बुरी हालत की बात करती रही हैं लेकिन इन दिनों सबको लग रहा है उनका कहना ग़लत नहीं है.

कई बड़ी आईटी कंपनियों के शहर बंगलौर में घुटनों तक पानी जमा है और लोगों को भारी दिक़्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

बंगलौर में लगभग पूरे साल बारिश होती है लेकिन जब भी भारी बारिश होती है तो सड़कों पर पानी भर जाता है, सरकार हर बार यही कहती है--प्रकृति के आगे हम क्या कर सकते हैं.

सिर्फ़ दो महीने पहले ही बंगलौर में भारी बारिश हुई थी तो शहर का बुरा हाल हो गया था, तब अधिकारियों ने कहा था कि वे नालियों की सफ़ाई कराएँगे ताकि सड़क पर पानी जमा न हो.

लेकिन पिछले दिनों की बारिश के बाद सेना के इंजीनियरों को कचरा साफ़ करने और पानी में फँसे लोगों को निकालने के लिए बुलाना पड़ा. शहर के कई इलाक़ों में बिजली सप्लाई अब भी ठप है और पीने का पानी नहीं है.

तेज़ बारिश और बाढ़ की वजह से बंगलौर में अब तक छह लोगों की मौत भी हो चुकी है.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री धर्म सिंह ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई है, सड़कों और बाँधों की मरम्मत के लिए पाँच अरब रूपए की सहायता माँगी है.

विकास के सवाल

बंगलौर की ट्रैफ़िक पुलिस को मोबाइल फ़ोन कंपनियों से अनुरोध करना पड़ा कि वे अपने ग्राहकों को एसएमएस भेजकर कार लेकर घर से बाहर निकलने के लिए मना करें.

शहर की तीन बड़ी झीलों का पानी रिहाइशी इलाक़ों में घुस गया है, कहीं-कहीं तो पानी एक मीटर से भी ज़्यादा है.

बिना किसी सोची-समझी योजना के शहर के विकास के ख़तरों से कई पर्यावरणवादी आगाह करते रहे थे, अब उनका कहना है--"हमने तो पहले ही कहा था."

जिस बंगलौर में एक ज़माने में 260 झीलें थीं अब उनकी संख्या सिर्फ़ साठ रह गई है.

पर्यावरणविद सुरेश हेबिलनकर कहते हैं, "मनमाने और अनियंत्रित विकास की वजह से पानी का बहाव बुरी तरह बाधित हुआ है जिसका परिणाम अब दिख रहा है."