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बुधवार, 26 अक्तूबर, 2005 को 03:30 GMT तक के समाचार

'मदद देने में अमीर देशों ने कोताही बरती'

अंतरराष्ट्रीय कल्याणकारी संस्था ऑक्सफ़ैम का कहना है कि दुनिया के कई अमीर देश दक्षिण एशिया में आए भूकंप के बाद मदद करने में कोताही कर रहे हैं.

ऑक्सफ़ैम का कहना है कि अब तक संयुक्त राष्ट्र की अपील पर सिर्फ़ तीस प्रतिशत धनराशि दिए जाने का वादा किया गया है.

संस्था का कहना है कि जापान, अमरीका, जर्मनी और इटली ने अपने सामर्थ्य से बहुत कम सहायता दी है जबकि कुछ देशों ने तो कुछ भी नहीं दिया है.

बुधवार को दक्षिण एशिया में आए भूकंप के सिलसिले में दानदाता देशों की बैठक स्विट्ज़रलैंड के जेनेवा शहर में हो रही है, उसके ठीक पहले ऑक्सफ़ैम ने यह बयान जारी करके उन्हें एक तरह से झकझोरने की कोशिश की है.

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र ने आर्थिक दिक्कतों पर चिंता प्रकट की थी और कहा था कि आठ लाख से अधिक लोगों का जीवन ख़तरे में पड़ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि लगभग 20 प्रतिशत ज़रूरतमंद लोगों तक अब भी सहायता नहीं पहुँच पाई है.

पाकिस्तान सरकार का अनुमान है कि आठ अक्तूबर को आए भूकंप में 53 हज़ार लोग मारे गए हैं, जबकि भारत प्रशासित कश्मीर में कम से कम 1400 लोगों की मौत हुई है.

समस्याएँ

ऑक्सफ़ैम के एक वरिष्ठ अधिकारी फिल ब्लूमर का कहना है कि "पाकिस्तान में ज़रूरतमंद लोगों तक पहुँचने में वैसे ही इतनी समस्या आ रही है, उसके ऊपर से पैसे की कमी होना बहुत भारी पड़ सकता है."

ब्लूमर ने बताया है कि सात अमीर देशों---बेल्जियम, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, फिनलैंड, ग्रीस, पुर्तगाल और स्पेन--ने अभी तक कोई मदद नहीं की है.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि देशों ने जितना धन देने का वादा किया है उसका सिर्फ़ 20 प्रतिशत ही अब तक असल में दिया गया है.

ऑक्सफ़ैम ने आगाह किया है कि यह हज़ारों लोगों के जीवन-मरण का प्रश्न है.