बुधवार, 12 अक्तूबर, 2005 को 08:38 GMT तक के समाचार
भारत में बुधवार, 12 अक्तूबर से सूचना का अधिकार क़ानून लागू हो रहा है जिसके बाद लोगों को सरकार के ज़्यादातर विभागों से सूचना हासिल करने का अधिकार मिल जाएगा.
देश के दस राज्यों में पहले से ही यह क़ानून लागू है लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे पहली बार लागू किया जा रहा है.
इस क़ानून से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता आने और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद की जा रही है.
हाल ही में संसद ने इस क़ानून को अपनी मंज़ूरी दी थी. हालाँकि 2002 में भी इस क़ानून को लागू करने की कोशिश की गई थी लेकिन लागू नहीं किया जा सका.
इसके साथ ही भारत दुनिया का 61 वाँ देश हो गया है जहाँ सूचना का अधिकार लागू है. सबसे पहले स्वीडन में 1766 में सूचना का अधिकार लागू हुआ था.
अधिकार
इस क़ानून के तहत कोई भी व्यक्ति या संस्था किसी भी सरकारी संस्था से कोई भी सूचना हासिल करने के लिए आवेदन कर सकते हैं.
रक्षा जैसे कुछ संवेदनशील मामलों को छोड़कर शेष सभी मामलों में एक निश्चित राशि जमा करके ये सूचनाएँ हासिल की जा सकती हैं.
ग़रीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के लिए सूचना बिना शुल्क उपलब्ध करवाई जाएगी.
सूचना देने के लिए आवेदन स्वीकार न करने और 30 दिनों के भीतर सूचनाएँ उपलब्ध न करवाने की स्थिति में 250 रुपए प्रतिदिन और अधिकतम 25 हज़ार रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.
इसके लिए हर राज्य में एक सूचना आयोग बनाया जाएगा और एक सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जाएगी. इस आयोग में अधिकतम दस सदस्य होंगे.
सूचना न मिलने की स्थिति में इस आयोग के समक्ष अपील की जा सकेगी.