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शनिवार, 08 अक्तूबर, 2005 को 11:53 GMT तक के समाचार

एजाज़ मेहर
इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता

'जीवित बचना एक करिश्मा'

शनिवार की सुबह आए भूकंप से पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मरगला टॉवर का एक ब्लॉक पूरी तरह से ढह गया और एक अन्य भी ब्लॉक का कुछ हिस्सा भी गिर गया.

जो ब्लॉक गिरे हैं उनमें संयुक्त राष्ट्र और पाकिस्तानी मंत्रालयों के कुछ कर्मचारी रहते हैं.

मरगला टॉवर के एक निवासी मुमताज रजपुर ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि जब भूकंप आया तो उनकी इमारत झूले की तरह हिलने लगी थी.

भूकंप से हुई तबाही की तस्वीरें

उनके मुताबिक़ उन्होंने जब खिड़की से झाँककर देखा तो उनके साथ वाला ब्लॉक नंबर चार ज़मीन पर गिर चुका था और वो ख़ुदा को याद करते हुए और चीख़ते-पुकारते बच्चों को साथ लेकर भागने लगे.

मुमताज़ राजपुर ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार को ख़ुदा ने एक नई ज़िंदगी दी है और यह एक करिश्मा ही था कि वो बच गए. उन्होंने कहा कि मरगला टॉवर के गिरने का मंज़र अब भी उनकी आँखों में घूम रहा है और अब भी ख़ुद को बहुत डरा हुआ महसूस कर रहे हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर में भूकंप का क़हर

मुमताज़ राजपुर ने आरोप लगाया कि निर्माण में घटिया सामान इस्तेमाल करने की वजह से ये तबाही हुई है.

पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस के एक कर्मचारी मुमताज़ राजपुर ने बताया कि मरगला टॉवर के पाँच ब्लॉक हैं और हर ब्लॉक में तीस अपार्टमेंट हैं.

हर अपार्टमेंट की क़ीमत अनुमान के मुताबिक़ सवा करोड़ रुपए से ज़्यादा बताई जाती है.

सुरक्षा के बेहतर इंतज़ामों और सुवधाओं की वजह से ज़्यादातर विदेशी लोग ही इस टॉवर में अपनी रिहाइश रखना पसंद करते हैं.

पूरी तरह गिरे टॉवर के क़रीब रहने वाले ज़ुल्फ़ेक़ार अली ने बताया कि तबाही की जगह सबसे पहले आम लोग पहुँचे और उन्होंने तुरंत मलबा हटाना शुरू कर दिया.

स्वयं सेवकों ने घायलों को भी मलबे से निकालना शुरू कर दिया था. पुलिस और फौज बाद में पहुँचे.

प्रशासन ने बाद में क्रेन मंगवाई जो मलबा हटाने के काम में जुट गई.

एक युवक को पाँच घंटे मलबे में दबे रहने के बाद जीवित निकालने में कामयाबी मिली और जब उसे स्ट्रेचर पर लिटाया गया तो जीवित बच जाने की ख़ुशी में हाथ हिलाकर लोगों का शुक्रिया अदा कर रहा था.

उस युवक को एक एंबुलेंस में लिटाकर अस्पताल पहुँचाया गया.

धराशायी हुए टॉवर के निवासियों के रिश्तेदार रोते और बिलखते हुए इधर-उधर भागते नज़र आए.

कई नौजवानो और छात्रों ने मलबा हटाने में बड़ी मदद की और क़तार लगाकर उन्होंने छोटे-छोटे टुकड़ों को हटाया. भारी मलबे को क्रेन की मदद से हटाया गया.