शुक्रवार, 07 अक्तूबर, 2005 को 09:14 GMT तक के समाचार
रघुवंश प्रसाद
केंद्रीय मंत्री और आरजेडी नेता
विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट से प्रार्थना की थी कि भंग विधानसभा को बहाल किया जाए और विधानसभा चुनावों पर रोक लगाई जाए लेकिन इन दोनों मांगों को सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने न तो भंग विधानसभा को बहाल करने को कहा है और न ही चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.
इससे साफ़ होता है कि जो प्रक्रिया चल रही है वो चलती रहे और वो जायज़ है.
अब कुछ लोग इसे इस तरह बता रहे हैं कि फ़ैसले में विधानसभा भंग को असंवैधानिक ठहराया गया है. यह तो चर्चा का विषय है, सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला यह रहता कि विधानसभा भंग का फ़ैसला असंवैधानिक है तब तो विधानसभा फिर से बहाल हो जाती. ऐसा फ़ैसले में नहीं है, यह तो विपक्ष की माँग थी.
पर फ़ैसले में न तो विधानसभा को बहाल करने की बात कही गई है और न ही चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगी है तो फिर इसे असंवैधानिक कैसे कहा जा सकता है.
मोटे तौर पर देखें तो सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष की माँग को ख़ारिज कर दिया है.
वही विधानसभा फिर से बहाल हो जाए, इसको सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है.
इसके लिए सरकार को ज़िम्मेदार ठहराना ग़लत है. सरकार का इस फ़ैसले से कुछ लेना-देना नहीं है.
विपक्षी दल बिना किसी सोच समझ के और बिना फ़ैसले को पढ़े टिप्पणी कर रहे हैं.
इससे कोई फ़र्क पड़नेवाला नहीं है और इसे गंभीरता से लेने कि ज़रूरत नहीं है.
यह एक क़ानूनी लड़ाई थी और इसमें विपक्षी दल हार गए हैं.
अभी ये लोग कोर्ट में हारे हैं और अब वोट की लड़ाई में भी हारेंगे.
(पाणिनी आनंद से बातचीत पर आधारित)