गुरुवार, 06 अक्तूबर, 2005 को 08:26 GMT तक के समाचार
आँध्र प्रदेश विधानसभा ने एक विधेयक पारित कर दिया है जिसमें मुसलमानों को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पाँच प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है.
ये आरक्षण परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर मिलेगा.
बुधवार को पारित इस विधेयक का भारतीय जनता पार्टी के अलावा सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया लेकिन भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया.
इस विधेयक का तेलुगू देशम पार्टी, सीपीआई और सीपीएम ने समर्थन किया.
उनका कहना था कि मुसलमानों के सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन को देखते हुए उन्हें आरक्षण की सख्त ज़रूरत है.
भाजपा विधायक दल के नेता जी किशन रेड्डी ने इस विधेयक को असंवैधानिक क़रार दिया और कहा कि इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति है.
उनका कहना है कि धर्म के आधार पर आरक्षण से समाज बंट जाएगा.
भाजपा नेता का कहना था कि यह आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के उस भावना के भी ख़िलाफ़ है जिसमें आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित करने की बात कही गई थी.
यह विधयेक इस साल जून में जारी उस अध्यादेश का स्थान लेगा जिस राज्यपाल सुशील कुमार शिंदे ने जारी किया था.
सोमवार को इस विधेयक को ग्रामीण विकास मंत्री डी श्रीनिवास ने पेश किया. उनके पास पिछड़ी जातियों के कल्याण की अतिरिक्त ज़िम्मेदारी है.
2004 में आँध्र विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस ने वादा किया था कि अगर वह सत्ता में आती है तो मुसलमानों के लिए पांच प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा.
सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने मुसलमानों के लिए आरक्षण लागू करने का अध्यादेश भी जारी करवा दिया था.
आँध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी का कहना है कि उनकी सरकार मुसलमानों को आरक्षण का लाभ पहुंचाने के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रही है.