मंगलवार, 04 अक्तूबर, 2005 को 21:13 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की हत्या की साज़िश करने के आरोप में चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है.
सैनिक अदालत ने दो अन्य लोगों को इसी मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
इन लोगों पर आरोप था कि इन्होंने 14 दिसंबर 2003 को राष्ट्रपति मुशर्रफ़ की कार को एक धमाके से उड़ाने की कोशिश की थी.
इसके ग्यारह दिन बाद रावलपिंडी में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर एक और जानलेवा हमला हुआ था जिसमें वे पहले हमले की ही तरह बाल-बाल बच गए थे.
रावलपिंडी के हमले के सिलसिले में भी पाँच लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है.
सैनिक अदालत के फ़ैसले में बताया गया है कि जिन चार लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई है वे वायु सेना के निचले दर्जे के अधिकारी हैं.
पाकिस्तान की खुफ़िया सेवाओं का कहना है कि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ पर हुए दोनों हमले अल क़ायदा ने कराए थे और उनका आपस में संबंध था.
फाँसी
एक पूर्व सैनिक इस्लामुद्दीन सिद्दीक़ी को पहले ही 14 दिसंबर के हमले के सिलसिले में मौत की सज़ा दी जा चुकी है.
राष्ट्रपति मुशर्रफ़ दोनों बम हमलों में इसलिए बच गए थे क्योंकि उनकी गाड़ी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल जैमिंग उपकरण लगा था जिसकी वजह से हमलावरों का रिमोट कंट्रोल काम नहीं कर सका.
25 दिसंबर को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की हत्या की साज़िश के सिलसिले में जिन पाँच लोगों को मौत की सज़ा सुनाई गई थी उन्होंने ऊपरी अदालत में अपील की है.
मौत की सज़ा के विरुद्ध अपील कर रहे एक व्यक्ति के वकील ने कहा, "इन मामलों में इंसाफ़ के हर पहलू की अनदेखी की गई है."
राष्ट्रपति मुशरर्फ़ पर हुए आत्मघाती हमले में सत्रह लोगों की मौत हो गई थी लेकिन वे बाल-बाल बच गए थे.