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शुक्रवार, 30 सितंबर, 2005 को 02:10 GMT तक के समाचार

सियाचिन पर सहमति-असहमति

भारत के रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि दुनिया के सबसे ऊँचे युद्ध क्षेत्र सियाचिन से सेनाएँ हटाने पर पाकिस्तान के साथ सहमति हो गई है लेकिन कितने सैनिक और किस तरह हटाए जाएँ इस पर अभी सहमति होना बाक़ी है.

समाचार एजेंसी पीटीआई का अनुसार प्रणब मुखर्जी ने कहा, "हम सहमत हो गए हैं. वे (पाकिस्तान) भी सियाचिन में मौजूदा स्थिति से सेना हटाने पर सहमत हो गए हैं "

"इस बारे में कोई दो राय नहीं हैं, दोनों पक्ष सहमत हो गए हैं."

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दि एक इंटरव्यू में प्रणब मुखर्जी ने कहा, "हम माँग कर रहे हैं कि सेना हटाने से पहले तैनाती के ठिकानों की पहचान करनी चाहिए ताकि यह रिकॉर्ड रहे कि किस देश की सेना कहाँ तक तैनात थी."

मुखर्जी ने कहा कि बस इसी मुद्दे पर असहमति बची है जबकि पाकिस्तान का कहना है कि जब सेना हटाने पर सहमति हो जाएगी तो फिर इस बात का क्या महत्व रह जाएगा कि किसके सैनिक कहाँ तक तैनात थे.

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत इसलिए इस पर ज़ोर दे रहा है ताकि सियाचिन ग्लेशियर पर अगर फिर से क़ब्ज़ा होता है तो पहले की तैनाती का रिकॉर्ड रहे.

उधर पाकिस्तान ने कहा है कि सियाचिन से सेना तैनाती कम करने के मुद्दे पर कुछ "महत्वपूर्ण मतभेद" बरक़रार हैं और दोनों पक्ष "गहन बातचीत" से उन मतभेदों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने प्रणब मुखर्जी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देश सियाचिन से सेना वापसी पर सहमत होने के लिए बातचीत कर रहे हैं.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दोनों देश सियाचिन ग्लेशियर से सेना तैनाती के मुद्दे पर 1989 में समझौते के काफ़ी क़रीब पहुँच गए थे लेकिन आख़िरकार समझौता नहीं हो सका था.

प्रवक्ता ने कहा कि 1989 में जो सहमति हुई थी पाकिस्तान उस समझौते पर बिना किसी देरी के दस्तख़त करने के लिए तैयार है, बशर्ते कि भारत भी इसके लिए तैयार हो.

सियाचिन ग्लेशियर की ऊँचाई 18 हज़ार से 22 हज़ार फुट तक है जहाँ भारत और पाकिस्तान की सेनाएँ तैनात हैं और वहाँ मौसम भी बहुत ख़राब रहता है.

दोनों देशों के हज़ारों सैनिक वहाँ मारे जा चुके हैं. दोनों देश सियाचिन ग्लेशियर से अपनी सैन्य तैनाती कम करने पर अनेक दौर की बातचीत कर चुके हैं लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है.