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गुरुवार, 29 सितंबर, 2005 को 08:24 GMT तक के समाचार

हवाई अड्डा कर्मचारियों की हड़ताल ख़त्म

भारत में हवाई अड्डों के लगभग 20,000 कर्मचारियों की दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के निजीकरण के प्रयास के विरोध में हुई हड़ताल ख़त्म हो गई है.

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के कर्मचारियों की 12 घंटे की ये हड़ताल भारतीय समयानुसार सुबह सात बजे शुरू हुई थी.

लेकिन केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध करने के लिए विभिन्न मज़दूर संगठनों की 24 घंटे की हड़ताल अभी भी जारी है.

हड़ताल का आह्वान मुख्य रूप से वामपंथी श्रमिक संगठनों ने किया है. कांग्रेस पार्टी से संबद्ध श्रम संगठन हड़ताल में शामिल नहीं हुआ है.

हड़ताल कर रहे श्रम संगठनों ने दावा किया है कि बैंकों और बीमा कार्यालयों के अनेक कर्मचारी उनकी हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं.

श्रम संगठनों ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर केंद्र ने उनकी माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो आगे और बड़ी हड़ताल हो सकती है.

वामपंथी नेता और ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महासचिव गुरूदास गुप्ता ने कहा,"अगर सरकार नहीं चेती तो ऐसी और हड़तालें होंगी".

हवाई अड्डा कर्मचारी

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण या एएआई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण विमानों के आवागमन पर असर पड़ा.

दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हड़ताली कर्मचारी रात से ही प्रदर्शन करते रहे.

वामपंथियों के प्रभाव वाले राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में हड़ताल का व्यापक असर हुआ.

समाचार एजेंसियों के अनुसार कोलकाता के नेताजी सुभाषचंद्र हवाई अड्डे से गुरूवार को एक भी हवाई जहाज़ ना तो उड़ा और ना उतर सका.

वैसे हड़ताल को ध्यान में रखकर आकस्मिक प्रबंध किए गए थे और दिल्ली व मुंबई समेत कई हवाई अड्डों पर वायुसेना और नौसेना के कर्मचारियों को तैनात किया गया.

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण कर्मचारी संगठन के महासचिव एम के घोषाल ने हड़ताल को सफल बताया है.

एजेंसी पीटीआई के अनुसार एम के घोषाल ने कहा,"दिल्ली में आमतौर पर एक घंटे में लगभग 50 विमान उड़ते और उतरते हैं. लेकिन हड़ताल शुरू होने के बाद ये संख्या घटकर दो से तीन रह गई".

हड़ताल के कारण जेट एयरवेज़, सहारा, किंगफ़िशर, स्पाइस जेट जैसी निजी विमान सेवा कंपनियों ने भी कई मार्गों पर अपनी उड़ानें रद्द की.

कर्मचारी दिल्ली और मुंबई हवाई अड्डों के 74 प्रतिशत शेयर निजी हाथों में बेचने की सरकार की योजना का विरोध कर रहे हैं.