बुधवार, 28 सितंबर, 2005 को 07:44 GMT तक के समाचार
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) में ईरान के ख़िलाफ़ मत डालने के मुद्दे पर वामपंथी दलों को आश्वस्त नहीं कर पाए.
इधर भारत का कहना है कि ईरान ने रिश्तों पर पुनर्विचार के कोई संकेत नहीं दिए हैं.
भारत सरकार को वामपंथी दलों और विपक्षी पार्टियों की तरफ़ से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. वामपंथी दलों ने भारत के इस फ़ैसले पर सवाल उठाए थे और इसकी वजह जाननी चाही थी.
ग़ौरतलब है कि वामपंथी दल मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे है.
प्रधानमंत्री ने बुधवार को नाश्ते पर वामपंथी दलों को आमंत्रित किया और यह बातचीत लगभग एक घंटे चली.
इस बैठक में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा और आरएसपी से अबनी राय मौजूद थे.
सरकार की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी और विदेश सचिव श्याम सरन मौजूद थे.
बातचीत के बाद सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वह पूरी तरह से अमरीका के साथ है जो न्यूनतम साझा कार्यक्रम में तय स्वतंत्र विदेश नीति का उल्लंघन है.
येचुरी का कहना था,'' भारत को दुनिया को बताना चाहिए कि हम ईरान मुद्दे को सुरक्षा परिषद में नहीं जाने देंगे.''
सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार के इस तर्क से कि ईरान के ख़िलाफ़ आईएईए में वोट देना, उसके हित में हैं, उससे न तो ईरान सहमत है और न ही वामपंथी दल सहमत हैं.
उनका कहना था कि सरकार का तर्क ऐसा है जैसे किसी कैंसर के किसी मरीज़ से कहा जाए कि उसके मारने का फ़ैसला उसके हित में है.
वामपंथी नेताओं का मानना है कि ईरान के ख़िलाफ़ प्रस्ताव का समर्थन करना बहुत बड़ी ग़लती है.
उनका मानना है कि जब पाकिस्तान,चीन और श्रीलंका जैसे देश निष्पक्ष रहे तो ऐसे में भारत ने अमरीका का साथ क्यों दिया.
भारत का स्पष्टीकरण
हालांकि भारत का कहना है कि उसे ईरान की ओर से आर्थिक सहयोग की समीक्षा के कोई संकेत नहीं मिले हैं.
सरकार की ओर यह सफ़ाई इन ख़बरों के बाद आई है कि भारत के ईरान के ख़िलाफ वोट देने के बाद उसने भारत के साथ लक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) आपूर्ति के 21 बिलियन डॉलर के सौदे को रद्द कर दिया है.
समझौते के तहत भारत ईरान से अगले 25 वर्षों तक पाँच मीटरिक टन एलएनजी हर साल आयात करेगा.
इस बीच भारत के विदेश सचिव श्याम सरन ने बुधवार को भारत में ईरान के राजदूत से मुलाक़ात की है. ईरान ने भारत के विरोध करने के फ़ैसले पर हैरानी जताई है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था कि भारत के रुख़ से ईरान हैरान है, ख़ास तौर पर तब जब हाल ही में गैस पाइपलाइन को लेकर दोनों देशों के बीच बात चल रही है.
ईरान ने चेतावनी दी थी कि जिन देशों ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बोर्ड की बैठक में उसका विरोध किया था, वह उनके साथ आर्थिक संबंधों पर फिर से विचार करेगा.