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गुरुवार, 22 सितंबर, 2005 को 22:21 GMT तक के समाचार

भारतीय बाघ की खाल चीनी बाज़ार में

भारतीय बाघ की खालें चीन के बाज़ारों में खुलेआम बिक रही हैं.

वन्य जीव संरक्षण से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं का कहना है कि भारत और चीन दोनों देशों में बाघ एक संक्षरित प्राणी है लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी है.

संयुक्त राष्ट्र की संधि पर भारत और चीन दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हैं और दोनों देशों में बाघ को मारने पर क़ानूनी प्रतिबंध है.

वन्य जीव संक्षरण की दिशा में सक्रिय दोनों संस्थाओं का कहना है कि चीन में जितनी भी खालें बिकती पाई गई हैं वे सब की सब भारत के बाघों की हैं.

वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को बाघों को बचाने के लिए तत्काल ठोस क़दम नहीं उठाए गए तो पूरी प्रजाति लुप्त हो सकती है.

दिल्ली में एनवारयन्मेंटल इनवेस्टीगेशन एजेंसी और वाइल्ड लाइफ़ प्रोटेक्शन सोसाइटी ने पत्रकारों को एक वीडियो दिखाया कि किस तरह भारतीय बाघों की खाल का अवैध कारोबार चल रहा है.

इन संगठनों का कहना है कि इन खालों की सबसे अधिक ख़रीद-बिक्री तिब्बती क्षेत्र में होती है, वीडियो में दिखाया गया है कि किस तरह लोग बाघ की खालों से बने कपड़े पहनते हैं.

ख़तरनाक

वाइल्ड लाइफ़ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ़ इंडिआ की प्रमुख बिलिंडा राइट ने कहा, "यह बाघों पर आई बहुत बड़ी आफ़त है, और यह उन्हें बचाने का आख़िरी मौक़ा है."

इस चौंकाने वाले वीडियो में साफ़ दिखाया गया है कि बाघों के खालों की न सिर्फ़ बिक्री होती है बल्कि उन्हें खुलेआम दुकानदार सजाकर रखते हैं, जो बताते हैं कि ये सारी खालें भारत से आती हैं.

यही वजह है कि भारत में बाघों की तादाद में भारी कमी आई है और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बाघों के संक्षरण के लिए एक विशेष कार्यदल का गठन किया है.

बाघों के संक्षरण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत से खालें नेपाल के रास्ते चीन जाती हैं और इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए तीनों देशों को मिलकर क़दम उठाना होगा.

अपनी जाँच के दौरान बाघ की 83 खालें देख चुकीं बिलिंडा राइट ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर भारत और चीन इस मामले पर एकजुट नहीं हुए तो बाघों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा."

संयुक्त राष्ट्र ने भी हाल ही में एक अपील जारी की है जिसमें बाघ को बचाने की अपील की गई है.