गुरुवार, 22 सितंबर, 2005 को 12:47 GMT तक के समाचार
भारत में लगातार गड़बड़ा रहे लिंगानुपात को ठीक करने के लिए सरकार ने एक और फ़ैसला किया है.
इसके तहत फ़ैसला किया गया है कि यदि परिवार में इकलौती संतान लड़की होगी तो उसे 12वीं तक की शिक्षा मुफ़्त दी जाएगी और इसके बाद स्नातकोत्तर स्तर तक की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी.
और यदि परिवार की दोनों संतानों में से दोनों लड़कियाँ हों तो उन दोनों को सभी तरह की फ़ीस में पचास प्रतिशत छूट होगी.
भारत सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय की यह योजना इसी वित्तीय वर्ष से शुरु हो जाएगी और इस योजना का लाभ सभी आयवर्ग के परिवार उठा सकेंगे.
कुछ दिनों पहले ही आँध्र प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि जिस परिवार में एकलौती संतान लड़की होगी उसे सरकार की ओर से एक लाख रुपए दिए जाएँगे.
इसके अलावा कई राज्यों में लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएँ लागू की गई हैं.
केंद्र सरकार की ओर से लड़कियों की शिक्षा के लिए यह एक बड़ी योजना है.
योजना
इस योजना के तहत जिस परिवार में माता पिता ने इकलौती लड़की के बाद परिवार नियोजन करवाने का फैसला कर लिया होगा उस परिवार की लड़की को इस योजना का लाभ मिलेगा.
दरअसल इस योजना के तहत लड़की को पाँचवी से लेकर 12 वीं कक्षा तक की शिक्षा मुफ़्त मिलेगी.
फिर इसके बाद कॉलेज में स्नातक और स्नातकोत्तर तक की पढ़ाई के लिए छात्रवृति दी जाएगी.
ये छात्रवृत्तियाँ मेरिट के आधार पर दी जाएँगी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी इसे लागू किया जाएगा.
व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 500 छात्रवृत्तियाँ दी जाएँगी जिसमें से 350 इंजीनियरिंग और 150 मेडिकल छात्राओं के लिए होंगी.
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन की ओर से बीए, बीएससी और बीकॉम तथा 18 ऑनर्स कोर्स के लिए योजना लागू होने के दूसरे साल से कोई पाँच हज़ार छात्रवृत्तियाँ होंगी. इसके तहत 2000 रुपयों की छात्रवृत्ति दी जानी है.
लेकिन सरकार का कहना है कि जब यह योजना पूरी तरह से लागू हो जाएगी तो इसका फ़ायदा हर साल 11000 लड़कियों को मिल सकेगा.
कागज़ी कार्रवाई कम
इस छात्रवृत्ति में विशेष बात यह भी होगी कि इस सुविधा का लाभ ले रही छात्रा को किसी और छात्रवृत्ति लेने से नहीं रोका जाएगा.
सरकार की ओर से कहा गया है कि इस योजना का लाभ लेने के लिए ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई नहीं करनी होगी.
इस योजना का लाभ लेने के लिए लड़की को प्रथम श्रेणी न्यायाधीश या किसी राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ एक शपथ पत्र देना होगा कि वह अपनी माता पिता की इकलौती संतान है.
सरकार ने कहा है कि चूँकि इंदिरा गाँधी देश की सबसे प्रमुख इकलौती कन्या संतानों में से एक थीं इसलिए इस छात्रवृत्ति का लाभ लेने वालों को 'इंदिरा गाँधी स्कॉलर' कहा जाएगा.