सोमवार, 19 सितंबर, 2005 को 03:59 GMT तक के समाचार
विनोद वर्मा
बीबीसी संवाददाता, काबुल से
अफ़ग़ानिस्तान में छिटुपट हिंसा के बीच वोलेसी जिरगा यानी संसदीय चुनावों और प्रांतीय परिषद के चुनावों के लिए मतदान संपन्न हो गया है.
मतगणना मंगलवार से शुरु होगी और अंतिम नतीजे आने में लगभग दो हफ़्तों का समय लगेगा.
एक वरिष्ठ चुनाव पर्यवेक्षक ने बताया कि कहीं से हिंसा की किसी बड़ी घटना की ख़बर नहीं आई जो एक संतोषजनक बात है.
पूरे अफ़ग़ानिस्तान से विभिन्न जगहों पर चरमपंथियों के हमले में कम-से-कम छह लोगों के मारे जाने का समाचार है.
लेकिन इन छिटपुट वारदातों का मतदान पर कोई गहरा असर नहीं पड़ा.
हिंसा की एक घटना में काबुल में जलालाबाद रोड पर दो रॉकेट दागे गए जिसमें एक कर्मचारी घायल हो गया.
इसी सड़क पर अंतरराष्ट्रीय चुनाव आयोग का दफ़्तर भी है. बताया गया कि विस्फोट इस दफ़्तर के पीछे वाले हिस्से में हुआ है.
इससे पहले शुक्रवार को ज़ाबुल में तालेबान समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हुई गोलीबारी में तीन पुलिसकर्मी मारे गए थे.
मतदान
लोगों ने सुबह ही मतदान केंद्रों में जाकर मतदान करना शुरु कर दिया. मतदान की प्रक्रिया शाम चार बजे तक चली.
उल्लेखनीय है कि संसद की 249 और 34 प्रांतीय परिषदों के लिए चुनाव हो रहे हैं.
लोकतंत्र की बहाली के लिए पहली बार हो रहे इन चुनावों के लिए उम्मीदवारों की बड़ी भीड़ थी.
संसद के लिए 2800 और प्रांतीय परिषदों के लिए 3000 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे.
इन चुनावों में महिलाओं को 25 प्रतिशत सीटों में आरक्षण भी दिया गया है.
अफ़ग़ानिस्तान के ज़ाबुल और कांधार समेत सभी दक्षिणी प्रांतों में सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता जताई गई थी क्योंकि वहाँ अभी भी तालेबानों और क़बायली नेताओं का बड़ा दबदबा है.
अमरीकी राजदूत रेनॉल्ड न्यूमैन ने भी काबुल के कुछ मतदान केंद्रों में जाकर मतदान प्रक्रिया का जायज़ा लिया.
बड़े मतपत्र
अंतरराष्ट्रीय चुनाव आयोग की देखरेख में हो रहे इन चुनावों के लिए एक करोड़ 20 लाख मतदाताओं को रजिस्टर किया गया था.
आयोग ने इन चुनावों के संपादन के लिए एक लाख 60 हज़ार कर्मचारियों को लगाया था.
सुरक्षा के लिए अफ़ग़ान नेशनल पुलिस के 55 हज़ार पुलिसकर्मी, अफ़ग़ान नेशनल आर्मी के 28 हज़ार जवानों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता बल (आईसैफ़) के जवानों सहित एक लाख सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए थे.
कई दुर्गम इलाक़ों में मतदान सामग्री को पहुँचाने के लिए ऊँट, गधों और घोड़ों की सहायता लेनी पड़ी.
इन इलाक़ों में मतदान कर्मियों को हेलिकॉप्टरों से पहुँचाया गया है.
बड़ी संख्या में मतदाताओं के होने के कारण मतपत्रो का आकार ख़ासा बड़ा था.
उदाहरण के तौर पर राजधानी काबुल में 33 सीटों के लिए 390 उम्मीदवार हैं और मतपत्र का आकार एक बड़े अख़बार के चार पन्नों जितना था.
मतदाता को संसद के साथ प्रांतीय परिषदों के लिए भी मतदान करना था.