गुरुवार, 15 सितंबर, 2005 को 14:14 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
चेन्नई से
भले ही मदनलाल खुराना का निष्कासन वापस हो गया हो पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी की पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी से नाराज़गी कम होती नज़र नहीं आ रही है.
दोनों के शीतयुद्ध की छाया पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक पर दिखाई देने लगी है.
वाजपेयी 16 सितंबर को शुरू हो रही पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में दोपहर बाद पहुँचेंगे. इस कारण पार्टी ने अपनी कार्यकारिणी की बैठक शाम साढ़े चार बजे शुरू करने का फ़ैसला किया है.पहले कार्यकारिणी की बैठक सुबह शुरू होनी थी.
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष वैंकया नायडू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थोड़ा देर से शुरू होगी और इसके पहले पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के साथ पार्टी के महासचिवों की बैठक होगी.
उनका कहना था कि वाजपेयी थोड़ा देर से पहुँच रहे हैं इसलिए कार्यक्रम में थोड़ा परिवर्तन किया गया है. इसका ज्यादा अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए.
ग़ौरतलब है कि पार्टी के भीतर लालकृष्ण आडवाणी के इस्तीफ़े को लेकर चल रही खींचतान के कारण 21 जुलाई से होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक टाल दी गई थी.
हालांकि भाजपा ने दलील दी थी कि संसद का सत्र जुलाई से शुरू हो रहा था इसलिए पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक की टालना पड़ा था.
वैंकया ने बताया कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तीन प्रस्ताव पारित होने की उम्मीद है. ये देश की राजनीतिक, आर्थिक और आंतरिक सुरक्षा की स्थिति पर होंगे.
भाजपा नेता का कहना था कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर पार्टी को बेहद चिंताएँ हैं क्योंकि यूपीए सरकार आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है. भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर में चरमपंथियों, पूर्वोत्तर में अलगाववादियों और विभिन्न राज्यों में माओवादियों की गतिविधियाँ बढ़ रही हैं.
उनका कहना था कि बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और असम के विधानसभा चुनावों पर भी चर्चा होगी.
शीतयुद्ध जारी
माना जा रहा है कि वाजपेयी और आडवाणी के बीच अभी शीतयुद्ध थमा नहीं है.
हाल में भाजपा नेता मदनलाल खुराना को लेकर आडवाणी और वाजपेयी में रस्साकशी चली थी.
पार्टी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी से बिना शर्त माफ़ी मांगने के बाद खुराना को पार्टी में वापस ले लिया गया था.
हालांकि वैंकया नायडू ने कहा कि अनुशासन या खुराना के मुद्दे पर कार्यकारिणी में कोई चर्चा नहीं होगी.
मदनलाल खुराना पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व पर सवाल उठाए थे और कहा था कि वो आडवाणी के नेतृत्व में काम नहीं कर सकते.
लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने खुराना का पुरज़ोर समर्थन कर दिया था. प्रेक्षकों का मानना है कि यह एक तरह से आडवाणी के फ़ैसले को चुनौती थी.
भाजपा अध्यक्ष आडवाणी के नेतृत्व को लेकर कई महीनों से विवाद चल रहा है और माना जा रहा है कि खुराना प्रकरण इसकी अगली कड़ी मात्र थी.
जानकारों का कहना है कि खुराना की वापसी से आडवाणी का पक्ष और कमज़ोर हो गया है.