शुक्रवार, 02 सितंबर, 2005 को 23:41 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता
भारत में सरकारी आँकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार में दिमाग़ी बुख़ार से मरने वालों की संख्या 500 को पार कर गई है.
हालाँकि कई ज़िलों के स्वास्थ्य प्रशासन इस बारे में पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं और कई गाँव ऐसे हैं जहाँ इस बीमारी से मरने वालों के बारे में कोई जानकारी ही नहीं दी जाती.
कॉग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सोमवार अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली के अस्पताल में भरती मरीज़ों को देखने आईं और उनका कहना है कि केंद्र सरकार दवाएँ और अन्य आवश्यक सामान भेज रही हैं.
इससे पहले उत्तर प्रदेश के डॉक्टरों ने चिंता प्रकट करते हुए कहा था कि जो दिमाग़ी बुख़ार गोरखपुर ज़िले के ग्रामीण क्षेत्रों में फैला हुआ था वह अब गोरखपुर शहर में भी पहुँच गया है.
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के बाल विभाग के डॉक्टर पीएन श्रीवास्तव ने बीबीसी को बताया कि गोरखपुर शहर के विभिन्न इलाक़ों से दिमाग़ी बुख़ार के लगभग बीस मरीज़ विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराए गए हैं.
इनमें से कुछ महीज़ों की मौत भी हो गई है.
गोरखपुर शहर से आए कुछ महीज़ शहर के ज़िला अस्पताल में भी भर्ती कराए गए हैं.
डॉक्टर श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 63 मरीज़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए जिनमें से कुछ की हालत काफ़ी गंभीर थी.
इसी अवधि में 20 मरीज़ों ने दम तोड़ दिया. इस तरह मेडिकल कॉलेज में दिमाग़ी बुख़ार से हुई मौतों की संख्या 349 हो गई है.
इनमें कुछ ऐसे मरीज़ भी थे जो पड़ोसी बिहार राज्य से आए थे.
दिमाग़ी बुख़ार से सबसे प्रभावित ज़िले हैं-गोरखपुर, महाराजगंज और कुशीनगर जहाँ पिछले महीने यानी अगस्त में दिमाग़ी बुख़ार से सिर्फ़ मेडिकल कॉलेज में ही 229 लोगों की मौत हो गई.
बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को डॉक्टरों की राय की परवाह नहीं करते हुए वापस ले गए क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के बचने की उम्मीद नहीं थी.
दूसरी तरफ़ बहुत से बच्चों ने अस्पताल ले जाते समय ही दम तोड़ दिया.
सरकारी आँकड़ों के अनुसार दिमाग़ी बुख़ार से अभी तक 400 लोगों की जान जा चुकी है लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि मृतकों की संख्या कहीं ज़्यादा हो सकती है.
डॉक्टरों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि मच्छरों से छुटकारा दिलाने वाली दवाई बड़े पैमाने पर छिड़की जाए और सुअरों को मानव बस्तियों से अलग किया जाए.
ग़ौरतलब है कि दिमाग़ी बुख़ार का वायरस सुअर के ज़रिए ही ज़्यादा फैलता है.
हालाँकि केंद्र सरकार ने चीन और कोरिया से दिमाग़ी बुख़ार की दवाई मंगाने का भरोसा दिलाया है लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इसे नंवबर के बाद ही प्रयोग किया जा सकता है.
जबकि नंवंबर के बाद से दिमाग़ी बुख़ार के मामलों में कमी आने लगती है.