मंगलवार, 30 अगस्त, 2005 को 13:14 GMT तक के समाचार
विवादित राजनीतिज्ञ और सिवान के राष्ट्रीय जनता दल सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन को गिरफ़्तार करने के लिए बिहार सरकार ने देशव्यापी अलर्ट घोषित कर दिया है.
बिहार के पुलिस महानिदेशक आशीष रंजन के अनुसार सभी राज्यों की पुलिस को सूचित कर दिया गया है कि शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ ग़ैरज़मानती वारंट है और वे जहाँ भी देखे जाएँ उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाए.
गिरफ़्तारी के लिए बिहार से दिल्ली आए पुलिस दस्ते को मिली असफलता और मोहम्मद शहाबुद्दीन की अलग-अलग जगह मौजूदगी की ख़बरें प्रकाशित होने के बाद ये फ़ैसला किया गया है.
बिहार के पुलिस महानिदेशक के अनुसार शहाबुद्दीन को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए आव्रजन विभाग को भी सूचना दी जा रही है.
उल्लेखनीय है कि जब बिहार पुलिस दिल्ली पहुँची उससे पहले शहाबुद्दीन दिल्ली में थे और संसद के मानसून सत्र में हिस्सा ले रहे थे.
लेकिन वे इसके बाद कहीं चले गए और सोमवार-मंगलवार को अख़बारों में ख़बरें प्रकाशित हुईं कि वे मुंबई के किसी रेस्तराँ में खाना खा रहे थे.
इस बीच आरजेडी सांसद शहाबुद्दीन लगातार पत्रकारों से बात करते रहे हैं और जैसा कि अख़बारों में ख़बरें प्रकाशित हुई हैं उन्होंने कहा है कि वे क़ानून से भाग नहीं रहे हैं लेकिन उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है.
अलर्ट
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार इससे पहले बिहार के गृह सचिव एके बिस्वास ने सिवान के ज़िलाधीश और पुलिस अधीक्षक का प्रस्ताव मुख्य सचिव जीएस कंग को भेजा था.
जिसे कंग ने स्वीकार करते हुए देशव्यापी अलर्ट की अनुमति दे दी थी.
इसके बाद सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशक और गृहसचिवों को सहायता के लिए अलर्ट की प्रतियाँ भेज दी गईं और उनसे सहयोग की अपील की गई.
उन्होंने पहले कहा था, "शहाबुद्दीन पिछले दस दिनों से बिहार नहीं आए हैं और हम गिरफ़्तारी वारंट तामील करने के लिए गंभीरता से लगे हुए हैं."
वैसे तो शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ आठ ग़ैर ज़मानती वारंट है लेकिन जिस मामले में पुलिस उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट लेकर घूम रही है वह हथियारों को लेकर है.
उल्लेखनीय है कि प्रशासन ने उनसे कहा था कि उनके और उनके परिवार के पास जो भी लाइसेंसी हथियार हैं उसे वे प्रशासन को सौंप दें लेकिन ऐसा न करने के कारण उनके ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किया गया है.
बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर का कहना है कि बिहार सरकार पर चुनाव आयोग के उस आदेश का भी दबाव है जिसमें कहा गया है कि सरकार उन लोगों को जल्दी से जल्दी गिरफ़्तार करे जिनके ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट है.
उनका कहना है कि शहाबुद्दीन को पिछले चुनाव के समय ज़िलाबदर किया गया था इसलिए प्रशासन पर अगले चुनाव से पहले उनकी गिरफ़्तारी का दवाब और अधिक है.