मंगलवार, 30 अगस्त, 2005 को 07:10 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारी पाकिस्तान की जेल में 15 साल से बंद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह से मिले हैं.
सरबजीत सिंह को पाकिस्तान मनजीत सिंह बताता है. पाकिस्तान की सर्वोच्च अदालत ने उसे जासूसी और बम धमाकों से संबंधित होने के दोष में फाँसी की सज़ा सुनाई है.
अमृतसर के नज़दीक भीखीविंड निवासी सरबजीत सिंह के निर्दोष होने का दावा करते हुए उसके रिश्तेदार उसकी रिहाई की माँग कर रहे हैं.
हाल में उनके रिश्तेदारों ने सांसदों के माध्यम से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तक ये मामला पहुँचाया.
इसके बाद विदेश मंत्री नटवर सिंह भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त से मिले थे.
इन सब गतिविधियों के चलते पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को सरबजीत सिंह से मिलने की इजाज़त दे दी थी.
'सरबजीत को उम्मीद'
अली सलमान के अनुसार राजनयिकों की 15 साल से जेल में क़ैद सरबजीत सिंह से बातचीत लगभग एक घंटे तक चली.
अली सलमान का कहना है कि इस बातचीत के बाद भारतीय अधिकारी दीपक कौल ने पत्रकारों को बताया कि सरबजीत को उम्मीद है कि उनकी रिहाई हो सकती है.
महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अध्यक्ष अस्मा जहाँगीर ने कहा है कि सरबजीत सिंह जैसे क़ैदियों को रिहा कर दिया जाना चाहिए या कम से कम उन्हें मौत की सज़ा नहीं दी जानी चाहिए.
बीबीसी हिंदी सेवा से एक विशेष बातचीत में उन्होंने संकेत दिए कि सरबजीत सिंह के ख़िलाफ़ कोई ठोस सबूत नहीं हैं और उन्हें जिस तरह से फाँसी की सज़ा सुनाई गई है उस पर उन्हें हैरत हुई है.
उनका कहना था, "उनके ख़िलाफ़ जो एफ़आईआर है, वह एक ब्लाइंड एफ़आईआर है, यानी किसी घटना के बाद कहा जाता है कि इसके लिए अज्ञात लोग ज़िम्मेदार हैं. एफ़आईआर में उनका नाम नहीं है."