मंगलवार, 30 अगस्त, 2005 को 08:54 GMT तक के समाचार
केंद्र सरकार ने फ़ैसला किया है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए राज्यपाल ने जो रिपोर्ट गृहमंत्रालय को भेजी थी उसे सार्वजनिक कर दिया जाए.
वैसे तो राज्यपाल की रिपोर्ट गोपनीय होती है और यह विशेषाधिकार का मामला होता है लेकिन सरकार ने अपवाद के रुप में इसे प्रकाशित करने का फ़ैसला किया है.
बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी की अध्यक्षता वाले एक पीठ को सरकार की ओर से यह सूचना दी गई है.
इस मामले में सुनवाई के दौरान एक आवेदन लगाया गया था जिसमें राज्यपाल की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की गई थी.
सरकार की ओर से कहा गया है कि याचिकाओं के जवाब में सरकार जो शपथ पत्र देने जा रही है, राज्यपाल की रिपोर्ट उसी के साथ लगा दी जाएगी.
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल ने 27 अप्रैल और 21 मई को दो रिपोर्टें भेजी थीं जिसमें राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया है.
माना जाता है कि राज्यपाल ने इस रिपोर्ट में कहा था कि यदि राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया गया तो विधायकों की ख़रीदफ़रोख़्त होने की संभावना है.
केंद्र सरकार ने 22 और 23 मई की रात बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का फ़ैसला किया था.
सरकार के इस फ़ैसले पर विपक्षी दलों ने आपत्ति की थी और कहा था कि वहाँ वैकल्पिक सरकार बनाने का मौक़ा नहीं दिया गया.