शनिवार, 27 अगस्त, 2005 को 11:35 GMT तक के समाचार
अधिकारियों का कहना है कि पिछले चार महीनों में महाराष्ट्र में छह साल के कम उम्र के तकरीबन 1600 बच्चों की मौत हुई है और इसमें से ज़्यादातर की कुपोषण के कारण मौत हुई है.
सरकार का कहना है कि ज़्यादातर बच्चों की मौत महाराष्ट्र के आदिवासी बहुल इलाक़े में हुई है.
मुंबई हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए एक योजना पेश करने को कहा है.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना था कि साक्षरता की कमी, ग़रीबी और आदिवासियों का अलग-थलग जीवन इसकी वजह है.
सरकार का कहना है कि ज़्यादातर मौतें थाणे, नासिक, अमरावती और गढ़चिरोली में हुईं हैं.
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त निदेशक पीपी ढोके ने बीबीसी को बताया, ''हम मानते हैं कि संख्या बहुत बड़ी है और हम सब यह कोशिश कर रहे हैं कि प्रभावित लोगों की संख्या में कमी आए.''
उनका कहना था कि ज़्यादातर मौतें आदिवासी इलाक़ों में हुई है जहाँ लोग साक्षर नहीं हैं और राज्य के अधिकारियों के साथ उनका संपर्क नहीं है.
पीपी ढोके का कहना था कि सरकार ने नई योजना शुरू की है जिसके तहत माँ और बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराया जा सके.
साथ ही ग्रामीण इलाक़ों में अस्पताल स्थापित किए जा रहे हैं और लोगों को इनमें जाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
हाई कोर्ट ने सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए एक योजना पेश करने का निर्देश दिया है.