मंगलवार, 23 अगस्त, 2005 को 13:16 GMT तक के समाचार
सफ़िया हलीम
बीबीसी अफ़ग़ान सेवा
"आप औरतों को क्यों ट्रेनिंग दे रही हैं. अभी तक अफ़ग़ानिस्तान के मर्दों को पूरी तरह से तालीम नहीं दी गई."
ये वो शब्द थे जोकि अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी प्रांत नंगरहार में महिलाओं के लिए पत्रकारिता के एक विशेष कोर्स के ऐलान पर एक मर्द ने कहे.
ये बात सच है कि अफ़ग़ानिस्तान में शिक्षा का स्तर बहुत नीचे है और जब भी कभी लड़कियों के स्कूल की या शिक्षा की बात होती है तो फ़ौरन कहा जाता है कि यहाँ लड़कों के स्कूल अभी नहीं खुले हैं.
लेकिन औरत को शिक्षा या घर से बाहर काम-काज की इजाज़त ना देने का ये कोई बहाना नहीं है.
आमतौर पर समाज बहुत परंपरावादी है. पिछले पंद्रह साल से यूरोप में रहने वाली एक अफ़ग़ान महिला नाज़िया पहली बार अपने मुल्क पहुँची तो उन्हें बड़ा अजीब लगा कि बहुत सी शिक्षित औरतें घर से बाहर सिर ढक कर जाती हैं.
नाजिया को एक सेमिनार में बुलाया गया तो वो नंगे सर वहाँ पहुँचीं.
लिबास पर एतराज़
उन्होंने टांगों तक लंबा स्कर्ट पहन रखा था. सेमिनार के बाद कुछ युवाओं ने उनके पास आकर उनपर ऐतराज़ किया कि वो क्यों "दूसरी औरतों की तरह सिर पर स्कार्फ़ या दुपट्टा नहीं ओढ़तीं."
अफ़ग़ानिस्तान में बीबीसी वर्ल्ड सर्विस ट्रस्ट की तरफ़ से पत्रकारों को चुनाव की कवरेज के लिए प्रशिक्षण का ये प्रोजेक्ट एक साल तक रहा.
इसमें 750 के क़रीब नौजवान पत्रकारों को ट्रेनिंग दी गई. उनमें लगभग 140 महिलाएँ भी शामिल थीं.
शुरू के कोर्सों में काफ़ी महिलाएँ शामिल रहीं लेकिन बाद में उनकी संख्या कम होती गई और जलालाबाद में तो एक भी महिला कोर्स में नज़र नहीं आई हालाँकि वहाँ इस समय दो रेडियो स्टेशन चलते हैं और अनगिनत अख़बार और पत्रिकाएँ छपते हैं.
पूछने पर मालूम हुआ कि उन संस्थाओं में काम कनरे वाली महिलाएँ सख़्त परदे में होती हैं और वे पुरुषों के साथ एक कमरे में सारा दिन नहीं गुज़ार सकतीं.
इन हालात में हमने उन महिलाओं के लिए एक अलग कोर्स का इंतज़ाम कर दिया. ट्रेनिंग के लिए भी एक महिला को भेज दिया.
कोर्स के दौरान ये महिलाएँ बाहर इंटरव्यू के लिए भी गईं और रेडियो पर प्रोग्राम बनाने के लिए काफ़ी मेहनत और शौक़ से काम करती रहीं.
अफ़ग़ान समाज की इन पाबंदियों की वजह से कुछ सूबों में महिलाओं के लिए अलग रेडियो स्टेशन बनाए गए हैं.
इनमें फ़ारबाद का कोहाश रेडियो, कंदूज़ में ज़हदा रेडियो, हैरात में सहर रेडियो और काबुल में "अफ़ग़ान औरत की आवाज़" रेडियो का ज़िक्र किया जा सकता है.