गुरुवार, 18 अगस्त, 2005 को 09:42 GMT तक के समाचार
बांग्लादेश में बुधवार को हुए बम धमाकों की कड़ी आलोचना की गई है. इन धमाकों में दो लोग मारे गए थे जबिक 100 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे.
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया ने कहा है कि हमलावर लोकतंत्र के दुश्मन हैं.
अमरीका ने भी इन हमलों की निंदा करते हुए कहा है कि ये एक जघन्य काम है.
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी ने शनिवार को आम हड़ताल का आह्वान किया है. उसका आरोप है कि सरकार अपराधियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में विफल रही है.
बुधवार को पूरे देश में क़रीब 350 बम धमाके एक साथ किए गए. सभी धमाके भीड़-भाड़ वाले इलाक़ों में हुए.
सुरक्षा स्थिति
एक प्रतिबंधित संगठन जमातुल मुजाहिदीन को इस घटना के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है क्योंकि घटनास्थलों पर संगठन के पर्चे पाए गए हैं.
ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस के अधिकारी मोहम्मद मज़हरुल ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि मामले की जाँच चल रही है.
अधिकारियों ने बताया है कि घटनास्थलों से कुछ उपकरण मिले हैं और विस्फोट में ज़्यादातर देसी बमों का इस्तेमाल किया गया है.
हमले के बाद बांग्लादेश में सुरक्षा इंतज़ाम और कट्टरपंथी गुटों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
पूर्व ब्रिगेडियर जनरल शौकत हुसैन ने एएफ़पी से बातचीत में कहा, “जिसने भी ये काम किया है उसने बहुत बड़ा संकेत दिया है. हमले से पता चलता है कि सुरक्षा स्थिति बेहद नाज़ुक है.”
धमकी
डेली स्टार अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सभी देशवासियों को चरमपंथियों के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ना चाहिए.
जमातुल मुजाहिदीन के पर्चों में लिखा गया है कि बांग्लादेश में इस्लामी क़ानून लगाने का वक़्त आ गया है. पर्चों में ‘बुश और ब्लेयर’ को मुस्लिम देशों से बाहर जाने की चेतावनी भी दी गई है.
बांग्लादेश सरकार ने इस साल के शुरू में जमातुल मुजाहिदीन समेत दो संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था.
इस प्रतिबंध को बांग्लादेश सरकार की नीति में बदलाव के तौर पर देखा गया था क्योंकि सरकार लंबे समय से कहती रही है कि इस्लामी चरमपंथ से देश को कोई खतरा नहीं है.