शुक्रवार, 12 अगस्त, 2005 को 07:34 GMT तक के समाचार
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के उस फ़ैसले को चुनौती दी है जिसमें उसने ताजमहल को वक्फ़ की संपत्ति बताया था.
पुरातत्व सर्वेक्षण ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सुन्नी वक्फ़ बोर्ड के फ़ैसले को चुनौती दी.
इसके पहले उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ़ बोर्ड ने कहा था कि उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ़ अधिनियम 1995 के प्रावधानों के तहत ताजमहल वक्फ़ की संपत्ति है.
इस प्रावधान में व्यवस्था है कि जहाँ कब्रें और मस्जिद हो, वह वक्फ़ की संपत्ति है.
लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा है कि वह ताजमहल की सिर्फ़ देखरेख नहीं करता बल्कि यह उसी की संपत्ति है.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा है कि 1920 के उर्दू में लिखे दस्तावेज़ उपलब्ध हैं जिसके अनुसार ताजमहल की मिल्कियत हिंदुस्तान की सरकार के पुरातत्व विभाग को सौंपी गई थी.
तभी से पुरातत्व विभाग के पास इसका स्वामित्व है और वही इसकी देखभाल करता है.
दरअसल ब्रितानी सरकार ने प्राचीन स्मारक संरक्षण अधिनियम की धारा-1 के तहत ताजमहल को संरक्षित इमारत घोषित कर दिया था.
इतिहासकारों का कहना है कि मुग़लकाल में इसे सरकारी संपत्ति क़रार दे दिया गया था.
पुरातत्व विभाग के अनुसार टिकट की बिक्री से पिछले साल लगभग 18 करोड़ रुपए की आमदनी हुई थी.
यदि ताजमहल को वक्फ़ बोर्ड की संपत्ति के रुप में दर्ज कर दिया जाता है तो ताजमहल में पर्यटकों से होने वाली आय का साढ़े सात प्रतिशत हिस्सा बोर्ड को चला जाएगा.
इसके पहले ताजमहल पर शिया वक्फ़ बोर्ड और हिंदू संगठनों ने भी दावा किया था. हिंदू संगठनों ने तो इसे मूल रूप से मंदिर क़रार दिया था.