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मंगलवार, 02 अगस्त, 2005 को 16:09 GMT तक के समाचार

बिहार पर विपक्ष का प्रस्ताव नामंज़ूर

लोकसभा में मंगलवार को बिहार में राष्ट्रपति शासन के दौरान क़ानून व्यवस्था के ख़िलाफ़ विपक्ष का प्रस्ताव बहुमत से नामंज़ूर कर हो गया.

धारा 184 के तहत रखे गए नीतीश कुमार के इस प्रस्ताव के पक्ष में 100 मत पड़े जबकि इसके विपक्ष में 172 वोट मिले. सदन में उपस्थित 275 सदस्यों में से तीन ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया.

इस प्रस्ताव के साथ ही केंद्रीय गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने बिहार में राष्ट्रपति शासन का प्रस्ताव भी रखा था जिसके विरोध में विपक्ष ने वॉकआउट किया और फिर ध्वनिमत से यह प्रस्ताव मंज़ूर कर लिया गया.

राज्यसभा में इसे पहले ही मंज़ूरी दी जा चुकी है.

लंबी बहस

नीतीश कुमार के प्रस्ताव पर लोकसभा में पाँच घंटे से अधिक बहस चली और इस पर बहुत हंगामा हुआ.

प्रस्ताव रखते हुए नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार पर तीखे हमले करते हुए कहा कि बिहार में राष्ट्रपति शासन काल में भी क़ानून व्यवस्था की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा कि यदि गृहमंत्री कहते हैं कि क़ानून व्यवस्था में सुधार हुआ है तो भी विपक्ष का यह दावा पुख़्ता होता है कि लालू प्रसाद यादव की पार्टी के शासन काल में बिहार की क़ानून व्यवस्था की स्थिति बदतर थी.

इस बहस के दौरान बिहार में राज्यपाल द्वारा किए गए तबादलों का मुद्दा भी उठाया गया और ये सवाल भी उठाया गया कि बिहार विधानसभा को भंग करने करने से पहले सरकार के गठन के प्रयास नहीं किए गए.

लेकिन सरकार की ओर से शिवराज पाटिल ने कहा कि राज्य में विधायकों को ख़रीदने के प्रयास हो रहे थे जिसके चलते विधानसभा को भंग करना पड़ा.

उन्होंने राज्यपाल को लिखी चिट्ठियों का भी ज़िक्र किया जिस पर सदन में हंगामा हुआ.

क़ानून व्यवस्था की स्थिति पर उन्होंने कहा, "हमारे पास आंकड़े हैं जिससे हम बता सकते हैं कि क़ानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन राज्यपाल से किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए."

हंगामें के बीच इस चर्चा के आख़िर में विपक्ष की मांग पर इस पर मतविभाजन हुआ और प्रस्ताव नामंज़ूर कर दिया गया.

इसके बाद राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव पर मत विभाजन होना था लेकिन विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "सरकारिया आयोग ने धारा 356 के दुरुपयोग को लेकर बहुत कुछ कहा था और बिहार का यह मामला इसी की एक कड़ी है."

इसके विरोध में विपक्ष ने वाकआउट किया और राष्ट्रपति शासन को छह महीने और बढ़ाने का प्रस्ताव ध्वनिमत से मंज़ूर कर लिया गया.