रविवार, 31 जुलाई, 2005 को 14:28 GMT तक के समाचार
पूर्वोत्तर भारत में विद्रोहियों ने सरकार के साथ युद्धविराम की अवधि बढ़ाने की घोषणा की है. विद्रोहियों ने छह महीने के लिए संघर्षविराम की समयसीमा बढ़ाई है.
लेकिन साथ ही सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालैंड (एनएससीएन) ने कहा है कि शांतिवार्ता की प्रगति को लेकर वे चिंतित है.
एक प्रवक्ता ने बताया कि फ़िलहाल समस्या का हल निकलने के कोई आसार नज़र नहीं आ रहे.
एनएससीएन के नेता मुइवा ने बीबीसी को बताया कि वो सिर्फ़ बातचीत जारी रखने के मक़सद से वार्ता में हिस्सा नहीं लेंगें.
बातचीत
उन्होंने कहा कि जब तक समस्या का हल निकलता दिखाई नहीं देता बातचीत जारी नहीं रह सकती.
इस असहमति के बावजूद विद्रोहियों और भारत सरकार के प्रतिनिधियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. इस बयान में संघर्षविराम और शांतिवार्ता की प्रकिया जारी रखने की बात कही गई है.
पिछले 40 साल से चला आ रहा नगा विवाद भारत का सबसे पुराना जनजातीय विवाद है.
विद्रोहियों की माँग है कि नगालैंड, असम, अरूणाचल प्रदेश और मणिपुर के हिस्सों के मिलाकर नगा जनजाति के लिए अलग राज्य बनाया जाए.
इस माँग को लेकर लड़ रहे विद्रोही गुट 1975 में बट गए थे. एक गुट ने केंद्र सरकार के साथ समझौता कर लिया था लेकिन कट्टरपंथी गुट ने 1997 तक अपना सशस्त्र अभियान जारी रखा.
सरकार और विद्राहियों के बीच 1997 में बातचीत शुरू हुई थी.