मंगलवार, 26 जुलाई, 2005 को 14:49 GMT तक के समाचार
असम के विवादास्पद क़ानून आईएमडीटी पर विपक्ष के स्थगन प्रस्ताव को मंगलवार को लोकसभा में ध्वनिमत से नामंज़ूर कर दिया गया.
लोकसभा में विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा था कि देश में ग़ैरक़ानूनी प्रवासियों की समस्या बहुत गंभीर है.
उन्होंने कहा कि उन्हें आशंका है कि सरकार वोट बैंक की राजनीति के चलते इस क़ानून को पीछे के रास्ते से फिर लागू करने की कोशिश कर रही है.
लेकिन सरकार की ओर से गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने विपक्ष की इस आशंका को खारिज करते हुए कहा कि सरकार इस क़ानून को फिर से लाती है तो इससे पहले सभी दलों से चर्चा की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने असम राज्य में ग़ैरक़ानूनी तरीके से पहुँचनेवाले बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए लागू विवादास्पद क़ानून, आईएमडीटी (इल्लीगल माइग्रेंट्स डिटरमिनेशन थ्रू ट्राइब्यूनल) क़ानून को गत 12 जुलाई को असंवैधानिक क़रार दे दिया था.
पहला स्थगन प्रस्ताव
यूपीए सरकार के 14 माह के कार्यकाल में यह विपक्ष का पहला स्थगन प्रस्ताव था.
इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरु करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने इस बात पर प्रसन्नता ज़ाहिर की कि सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसे क़ानून को समाप्त कर दिया है जो भारत के नागरिकों के बीच भेद पैदा कर रहा था.
उन्होंने कहा कि वोट बैंक की राजनीति सबसे घातक है और उन्हें डर है कि सरकार तुष्टिकरण के लिए इस क़ानून को फिर लाने की कोशिश करेगी.
सत्तापक्ष की ओर से इसका जवाब देते हुए सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि विदेशी नागरिक़ क़ानून का भारी दुरुपयोग होने के कारण ही आईएमडीटी को लागू किया गया था.
उन्होंने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों से असहमत होने का पूरा अधिकार है.
उन्होंने कहा कि वैध नागरिकों को वैध अधिकार दिलवाने के लिए क़ानून बनाने के लिए संसद स्वतंत्र है.
वामपंथी नेता बासुदेव आचार्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सही नहीं था.
जबकि गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा कि विपक्षी दलों का यह तर्क ठीक नहीं है कि ग़ैर क़ानूनी हिंदू प्रवासी तो शरणार्थी हैं लेकिन मुस्लिम घुसपैठिए हैं.
उन्होंने विपक्ष पर पलट कर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया.
उन्होंने आडवाणी की आशंका को निराधार बताते हुए कहा कि यदि सरकार इस क़ानून को किसी भी रुप में लागू करती है तो इससे पहले सभी राजनीतिक दलों से चर्चा की जाएगी.
इसके बाद लालकृष्ण आडवाणी ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि भारत में अवैध रुप से रह रहे बांग्लादेशियों की समस्या गंभीर है और इससे पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा को गंभीर ख़तरा पैदा हुआ है.
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने ध्वनिमत के आधार पर स्थगन प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया.
क़ानून और फ़ैसला
भारत के मुख्य न्यायाधीश आरसी लोहाटी की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय खंडपीठ ने असम गण परिषद के सांसद सर्वानंद सोनोवाल की जनहित याचिका पर अपने फ़ैसले में आईएमडीटी क़ानून को निरस्त कर दिया था.
इसके तहत गठित सभी न्यायाधिकरण तत्काल प्रभाव से काम नहीं करेंगे.
सोनावाल ने याचिका में आरोप लगाया था कि असम में ग़ैरक़ानूनी तरीके से रहनेवाले बांग्लादेशियों की बढ़ती संख्या ने राज्य में क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ कर रख दिया है.
उनका आरोप था कि क़ानून सिर्फ़ राजनीतिक दलों के वोट बैंक में इजाफ़े को बढ़ावा दे रहा है.
अवैध बांग्लादेशियों की पहचान के इरादे से यह क़ानून काँग्रेस पार्टी के शासनकाल में 1983 में बनाया गया था.
इस क़ानून के तहत अवैध प्रवासी की नागरिकता सिद्ध करने का दायित्व शिकायतकर्ता का था.