सोमवार, 25 जुलाई, 2005 को 13:01 GMT तक के समाचार
मानसून सत्र शुरु होने के पहले ही दिन केंद्र सरकार ने लाभ देने वाले सार्वजनिक क्षेत्रों के उपक्रमों को और अधिक स्वायत्तता देने की घोषणा की है.
इस फ़ैसले से लाभ कमाने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्रों के उद्योग जिन्हें नवरत्न के नाम से भी जाना जाता है ख़ुद पूंजी निवेश करने का फ़ैसला कर सकेंगी.
सरकार के इस फ़ैसले से ख़ुश वामपंथी दलों ने भेल का मामला संसद में न उठाने का फ़ैसला किया है.
मंत्रिमंडल के फ़ैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने कहा कि सरकार के इस फ़ैसले के बाद नवरत्न और दूसरी लाभ कमाने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ अपने कुल मूल्य के 15 प्रतिशत की राशि को कहीं भी निवेश कर सकेगी.
यह निवेश संयुक्त क्षेत्र के उपक्रम में हो सकता है या सहायक उद्योगों में.
सरकार ने इसके लिए एक हज़ार करोड़ रुपयों की सीमा भी तय की है.
इसके अलावा सरकार ने सरकारी गारंटी की शर्तों में भी ढील देने का फ़ैसला किया है.
ये उपक्रम नियुक्तियों और तबादले आदि का निर्णय भी ख़ुद ले सकेंगे.
वामपंथी ख़ुश
इस निर्णय पर ख़ुश वामपंथी दलों ने कहा है कि इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम अपने बारे में ख़ुद फ़ैसला करें.
वामपंथी नेता नीलोत्पल बसु ने कहा है कि इससे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे.
भेल के मामले को भी वामपंथी दलों ने अब संसद में न उठाने का फ़ैसला किया है.
उनका कहना है कि सरकार ने आश्वासन दिया है कि वह विनिवेश पर एक श्वेत पत्र लाएगी.
इससे पहले वामपंथी भेल के विनिवेश को लेकर नाराज़ थे और इसको लेकर यूपीए की बैठकों का भी बहिष्कार कर रखा था. माना जा रहा था कि इसे लेकर वे संसद में भी सरकार को घेर सकते हैं.