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सोमवार, 25 जुलाई, 2005 को 09:26 GMT तक के समाचार

बिहार में राष्ट्रपति शासन छह माह और

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को बिहार में राष्ट्रपति शासन को छह माह और आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है.

वहाँ 7 मार्च से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है और 22 मई को विधानसभा को भंग करने का फ़ैसला किया गया था.

तकनीकी रुप से केंद्रीय मंत्रिमंडल को यह निर्णय लेना ही था क्योंकि राज्य में छह माह से अधिक समय तक राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए केंद्र सरकार को दोबारा इसकी अनुशंसा करनी होती है.

उल्लेखनीय है कि बिहार में चुनाव हो जाने के बाद सरकार गठन के लिए कोई गठबंधन न हो पाने की वजह से बिहार विधानसभा भंग करके राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय लिया गया था.

विपक्षी गठबंधन एनडीए ने इस निर्णय को लोकतंत्र की हत्या कहा था.

इसके बाद चुनाव आयोग ने बिहार की परिस्थितियों का जायज़ा लेने के बाद कहा था कि वहाँ विधानसभा के नए चुनाव अक्तूबर-नवंबर से पहले नहीं करवाए जा सकते.

याचिका पर निर्देश

उधर सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के मामले में केंद्र सरकार और बिहार के राज्यपाल को नोटिस जारी किया है.

बिहार के एनडीए के कुछ पूर्व विधायकों की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए न्यायालय ने ये नोटिस जारी किया है.

न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए सरकार ने राष्ट्रपति को कौन से कागज़ात भेजे थे.

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और बिहार के राज्यपाल को जवाब देने के लिए तीन हफ़्तों का समय दिया है.