शुक्रवार, 22 जुलाई, 2005 को 07:37 GMT तक के समाचार
आशुतोष चतुर्वेदी
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
शुक्रवार को सभी भारतीय अख़बारों ने लंदन पर हुए चरमपंथी हमलों को अपनी हेडलाइन बनाया है.
ज़्यादातर अख़बारों ने पूरे आठ कॉलम में इस ख़बर को स्थान दिया है.
नवभारत टाइम्स की हेडलाइन है- लंदनवासियों ने एक बार फिर देखा काला गुरुवार. तीन मेट्रो स्टेशनों और एक बस में हुए विस्फोट, पूरे शहर में अलर्ट.
अख़बार लिखता है कि 7 जुलाई को 56 लोगों की जान लेनेवाले बम विस्फोटों के ठीक दो सप्ताह बाद गुरुवार को फिर चार विस्फोट हुए जिसने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया.
हिंदुस्तान की हेडलाइन है-ब्रिटेन की सुरक्षा तार-तार, फिर विस्फोट.
अख़बार ने लिखा है कि लंदन के तीन भूमिगत रेलवे स्टेशनों और एक बस में गुरुवार को हुए धमाकों ने लंदन में सात जुलाई के बम विस्फोटों की याद ताज़ा कर दी.
अमर उजाला की सुर्ख़ी है कि चार विस्फोटों के बाद फिर खौफ़ के घेरे में आया लंदन.
समाचारपत्र का कहना है कि ब्रिटिश राजधानी के लिए गुरुवार का दिन 7 जुलाई के चरमपंथी हमले की त्रासद यादें लौटाने वाला रहा.
दैनिक जागरण लिखता है कि धमाकों से थर्राया लंदन. अख़बार ने साथ ही पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ का बयान छापा है कि ब्रिटेन अपने यहाँ सक्रिय चरमपंथी संगठनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करेगा.
इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- 'लंदन शिवर्स ऑफ्टर फ़ीयर फ़ोर्टनाइट' यानी पखवाड़े के बाद लंदन फिर दहला.
अखब़ार की एक अन्य ख़बर है कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा कि 'मैं अपने यहाँ देखता हूँ, आप अपने देश में निपटे.'
स्टेट्समैन लिखता है- कॉपीकैट अटैक. अख़बार लिखता है कि लंदन में आतंकवाद फिर लौटा.
द हिंदू की सुर्ख़ी है- 'एक्सप्लोज़न कॉज़ पैनिक इन लंदन' यानी विस्फोट से लंदन में दहशत.
अख़बार ने लिखा है कि मेट्रोपोलिटन पुलिस प्रमुख का कहना है कि हमलावर लोगों को मारना चाहते थे लेकिन उनके कुछ उपकरणों ने काम नहीं किया.