मंगलवार, 19 जुलाई, 2005 को 12:57 GMT तक के समाचार
सीपीआई के महासचिव एबी बर्धन का कहना है कि दो देशों के बीच कोई भी बड़ा समझौता ऐतिहासिक कहलाता है.
अमरीका ने कोई मेहरबानी नहीं की है. उन्होंने अब माना है कि भारत भी एक परमाणु शाक्ति है और वो तो हम हैं ही.
उन्होंने इसे पहले ही मान लिया था लेकिन मान्यता नहीं दी थी.
परमाणु ईंधन के मामले में अमरीका रुकावट डालता था.वो न तो खुद ईंधन देते थे और न ही किसी और को देने देते थे.
वो फ़्रांस और रूस के ईंधन देने से रोकता रहा है. हालाँकि रूस फिर भी ईंधन देता था.
अब ये बंधन उठ जाएँगे और परमाणु ईंधन उपलब्ध होता रहेगा. इस समझौते का यही मतलब है.
प्रधानमंत्री की परमाणु ईंधन के संबंध में हमसे चर्चा हुई थी.
लेकिन इस दौरान रक्षा रणनीतिक समझौते की बात भी हुई है जिससे मैं सहमत नहीं हूँ.
मेरा मानना है कि दोस्ती का रिश्ता अलग है, हम दोस्त बन सकते हैं लेकिन सामरिक साझेदार नहीं बन सकते.
अमरीका की रक्षा रणनीति हमसे एकदम अलग है.
वो छोटे देशों पर हमला करते हैं, साम्राज्यवादी हैं, हमलावर हैं, लड़ाई छेड़ते हैं. हमारी ऐसी नीति नहीं है.
जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह वापस आएँगे तब उनका स्पष्टीकरण होगा और तभी सही बात सामने आएगी.
जहाँ तक ईरान-पाकिस्तान-भारत पाइप लाइन का संबंध है तो इसमें अमरीका के दखलंदाजी करने का कोई मतलब नहीं है.
अमरीका इसमें दखलंदाजी नहीं करेगा, ऐसी गारंटी भी हमने नहीं ली है.
(आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित)