मंगलवार, 19 जुलाई, 2005 को 09:38 GMT तक के समाचार
कश्मीर के प्रमुख अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस और कश्मीरी पंडितों के बीच 15 साल बाद बातचीत हुई है.
मीरवाइज़ उमर फारूक़ के नेतृत्व में हुर्रियत नेताओं ने कश्मीरी पंडितों के साथ उनकी वापसी के विषय में बातचीत की.
भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर स्थित हुर्रियत मुख्यालय में आयोजित इस बैठक में लगभग 100 कश्मीरी पंडितों ने हिस्सा लिया.
इनमें से ज़्यादातर जम्मू से आए थे. ये अपने तरह की पहली बैठक है जिसमें अलगाववादी नेता और विस्थापित पंडित आमने-सामने बातचीत कर रहे हैं.
हुर्रियत ने यह क़दम भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की पहल को देखते हुए उठाया है.
अखिल भारतीय हिंदू फ़ोरम के अध्यक्ष रतनलाल भान ने बीबीसी को बताया कि कश्मीरी पंडित हुर्रियत की हर उस पहल का समर्थन करेंगे जो कश्मीर समस्या का समाधान करेगी.
पर साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भारतीय संविधान के दायरे में होनी चाहिए.
पलायन
1990 के दशक में जब चरमपंथ अपने उफ़ान पर था तो चरमपंथियों ने चुन-चुन कर कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया था.
इससे भयभीत हज़ारों कश्मीरी पंडित अपना घर-बार छोड़कर राज्य से भागने को मजबूर हो गए थे.
कश्मीरी पंडित भारत प्रशासित कश्मीर से या तो जम्मू चले गए थे या देश के अन्य हिस्सों में पलायन कर गए थे. इनमें से बड़ी संख्या में लोग अब भी शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं.
उनमें से कुछ का मानना है कि इस आंदोलन को हवा देने में कुछ राजनीतिज्ञों का भी हाथ था जो इस सारे घटनाक्रम को अलगाववाद के बजाय सांप्रदायिक रंग देना चाहते थे.