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रविवार, 17 जुलाई, 2005 को 09:26 GMT तक के समाचार

भाजपा के महासचिवों की अहम बैठक

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवो की एक बैठक रविवार की शाम को हो रही है.

इस बैठक में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की 21 जुलाई से होने वाली बैठक में पेश किए जाने वाले प्रस्तावों पर चर्चा होनी है.

लेकिन कहा जा रहा है कि इस बैठक में प्रस्तावों से पहले अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के अध्यक्ष बने रहने को लेकर ही चर्चा होगी.

पार्टी के भीतर भाजपा अध्यक्ष आडवाणी को लेकर जिस तरह की खींचतान मची हुई है उसके चलते कार्यकारिणी की बैठक को लेकर भी अटकलें लगने लगी हैं कि यह बैठक होगी भी या नहीं.

हालांकि भाजपा प्रवक्ता ने शनिवार को कहा था कि न तो आडवाणी इस्तीफ़ा दे रहे हैं न कार्यकारिणी की बैठक स्थगित करने की कोई बात है.

संघ के नेता खुले रुप से कुछ नहीं कह रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे संघ की नाराज़गी एक बड़ा कारण है.

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने आडवाणी के ख़िलाफ़ खुलकर बयान दिए हैं और उनसे इस्तीफ़ा माँगा है.

माना जा रहा है कि कई और नेता हैं जो खुलकर सामने तो नहीं आए हैं लेकिन वे भी आडवाणी के पक्ष में नहीं हैं.

लेकिन लालकृष्ण आडवाणी इस्तीफ़ा न देने पर अड़े हुए हैं.

अब तक मदनलाल खुराना, प्यारेलाल खंडेलवाल, पार्टी के दो पूर्व अध्यक्ष जना कृष्णमूर्ति और बंगारू लक्ष्मण खुलकर सामने आ चुके हैं.

इससे पहले जब आडवाणी के बयान पर विवाद हुआ था तो मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, बाबूलाल मरांडी आदि नेताओं ने आडवाणी के ख़िलाफ़ बयान दिया था.

विचारधारा का संकट

संघ ने लालकृष्ण आडवाणी के बयान पर आपत्ति ज़ाहिर करते हुए कहा था कि यह विचारधारा का भटकाव है.

यह मुद्दा भाजपा की कार्यकारिणी में भी उठने की संभावना है.

ग़ौरतलब है कि भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 21 जुलाई से चेन्नई में होने जा रही है.

जैसा कि भाजपा नेता प्यारेलाल खंडेलवाल ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि वो पार्टी कार्यकारिणी में पार्टी की सैद्धांतिक प्रतिबद्धता, जिन्ना को लेकर उठे विवाद और एक व्यक्ति एक पद पर पार्टी का नज़रिया जानना चाहते है.

उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष आडवाणी ने अपने पाकिस्तान दौरे के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कह दिया था और इसे लेकर संघ परिवार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था.

इस विवाद के कारण लालकृष्ण आडवाणी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था हालांकि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा बाद में वापस ले लिया था.