मंगलवार, 12 जुलाई, 2005 को 10:22 GMT तक के समाचार
विश्वनाथ प्रताप सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ परिवार में मनोवृत्ति की समस्या है. यहाँ लोग बिना सोचे समझे प्रतिक्रिया व्यक्त कर देते हैं.
कुछ दिन पहले सर संघचालक सुदर्शन ने सभी राजनीतिज्ञों को 'वेश्या' क़रार दे दिया था.
दरअसल संघ परिवार की समस्या ये है कि उनकी कथनी और करनी में अंतर है.
हमें याद है कि जब हम सरकार में थे तो अटल बिहारी वाजपेयी और जसवंत सिंह भी हमारे साथ थे.
हमने उनसे कहा था कि इन साधु बाबा लोगों को बढ़ावा मत दीजिए.
हमारे यहाँ साधु बाबा लोग राजनीति में नहीं हैं इन्हें राजनीति में मत लाइए.
राजनीति में थोड़ा लचीला रवैया चाहिए लेकिन इनमें लचीलेपन का अभाव है.
इन्होंने इन तत्वों को राजनीति में प्रवेश करा दिया.
मैंने कहा था कि इससे या तो आपकी पार्टी बंट जाएगी और या फिर आप जैसे लोग किनारे कर दिए जाएंगे.
और अब नतीजा सामने है. लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी दोनों ही निशाने पर हैं.
दोनों उतने कट्टरपंथी नहीं हैं जितना संघ परिवार उन्हें देखना चाहता है.
जहाँ तक राजनीति से अवकाश ग्रहण करने का सवाल है तो मेरा मानना है कि इसके लिए कोई नियम नहीं हो सकता है.
लोगों को अपने आप मर्यादा रख लेनी चाहिए. दरअसल राजनीति कोई किताबी नियमों से नहीं चलती है.
राजनीति में लोग अनुभव से सीखते हैं. यदि ऐसा कोई नियम या क़ानून बनता है तो हम कुछ बड़े अनुभवी नेता खो देंगे.
अमरीका में ऐसी व्यवस्था है लेकिन यूरोप के अधिकांश देशों में ऐसा नहीं है.
लगभग सभी पार्टियों में बुजुर्ग नेता बड़े पदों पर हैं. मुझे लगता नहीं कि वो ऐसा कुछ करेंगे.
(आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित)