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मंगलवार, 12 जुलाई, 2005 को 04:59 GMT तक के समाचार

भाजपा ने महासचिवों की बैठक बुलाई

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को महासचिवों की बैठक बुलाई है. माना जा रहा है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के साथ चल रहे विवादों पर विचार-विमर्श के लिए यह बैठक बुलाई गई है.

सोमवार को आरएसएस के नेताओं ने भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी और पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी से मुलाक़ात की.

हालाँकि पार्टी की ओर से इस बैठक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. लेकिन आरएसएस के प्रवक्ता राम माधव ने जानकारी दी कि आरएसएस नेताओं ने आडवाणी और वाजपेयी से मुलाक़ात की है.

समझा जाता है कि संघ के नेताओं ने हाल ही में सूरत में हुई बैठक में हुई चर्चाओं और फ़ैसलों से आडवाणी और वाजपेयी को अवगत करवाया है.

संवाददाताओं का कहना है कि संघ ने एक बार फिर आडवाणी से कहा है कि संघ किसी भी क़ीमत पर वैचारिक और सिद्धांत के स्तर पर कोई समझौता नहीं करेगा.

बयान

संघ ने दो दिनों पहले भी एक बयान जारी करके कहा था कि संघ मूल रुप से तीन विषयों पर चिंतित है, एक तो वैचारिक भटकाव, दूसरा वाणी का संयम और तीसरा अनुशासनहीनता.

भारत के कई अख़बारों ने ख़बरे प्रकाशित की थीं कि संघ आख़िरकार आडवाणी को भाजपाध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए कह सकता है.

समाचार एजेंसियों के अनुसार संघ के महासचिव मोहन भागवत के नेतृत्व में मदनदास देवी और सुरेश सोनी ने आडवाणी और वाजपेयी से मुलाक़ात की है.

वाजपेयी के साथ संघ के नेताओं ने डेढ़ घंटे चर्चा की है.

मुलाक़ात

इससे पहले रविवार को संघ के नेताओं ने विश्व हिंदू परिषद के नेताओं से भी मुलाक़ात की थी.

उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष आडवाणी ने अपने पाकिस्तान दौरे के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कह दिया था और इसे लेकर संघ परिवार में बड़ा विवाद खड़ा हो गया था.

इस विवाद के चलते लालकृष्ण आडवाणी को इस्तीफ़ा देना पड़ा था हालांकि उन्होंने अपना इस्तीफ़ा बाद में वापस ले लिया था.

अयोध्या में हुए हमले के बाद शुक्रवार को लालकृष्ण आडवाणी वहाँ गए थे और उन्होंने जिस तरह से मंदिर के पक्ष में बयान दिए थे उसके बारे में विश्लेषकों ने कहा था कि वे हिंदुत्व की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं और जिन्ना के बयान से लगे दाग़ को धोने की कोशिश कर रहे हैं.

लेकिन संघ इस बयान से प्रभावित नहीं दिख रहा है क्योंकि इसके बाद ही संघ ने बयान दिया था कि वह सिद्धांत के मामले में कोई समझौता करने को तैयार नहीं है.