बुधवार, 06 जुलाई, 2005 को 09:22 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के दौरान 'भड़काऊ भाषण' देने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी को भी शामिल करने का आदेश दिया है.
इसके पहले रायबरेली की विशेष अदालत ने लालकृष्ण आडवाणी को इस मामले से बरी कर दिया था.
जस्टिस वाईआर त्रिपाठी ने हाशिम अंसारी और महबूब अली की याचिका स्वीकार कर ली. इसमें आडवाणी को बरी किए जाने को चुनौती दी गई थी.
साथ ही, अदालत ने भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी और अन्य याचिका भी खारिज़ कर दी, जोशी के वकीलों का कहना था कि जिस तरह आडवाणी को बरी किया गया था उन्हें भी उसी आधार पर बरी किया जाए.
इन नेताओं पर छह दिसंबर,1992 को बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के दौरान भड़काऊ भाषण देने का आरोप है.
रायबरेली की विशेष अदालत में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में मुरली मनोहर जोशी के साथ-साथ उमा भारती, विनय कटियार, अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, आचार्य गिरिराज किशोर और साध्वी ऋतंभरा पर मामला चल रहा है.
ग़ौरतलब है कि लालकृष्ण आडवाणी को इस मामले से बरी कर दिए जाने के फ़ैसले पर कई राजनीतिक दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी और कहा था कि सरकार को इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करनी चाहिए.
मुक़दमा
छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी.
इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने के लिए लोगों को भड़काया.
बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद देश भर में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में क़रीब दो हज़ार लोग मारे गए थे.
बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बारे में दो अलग-अलग मामलों की सुनवाई के लिए लखनऊ और रायबरेली में दो विशेष अदालतें गठित की गई थीं.
इस मामले में आडवाणी सहित 49 लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा चल रहा है.
लेकिन उच्च न्यायालय ने भाजपा और विहिप के आठ वरिष्ठ नेताओं से संबंधित मामले को अलग कर दिया था.