सत्ताधारी गठबंधन यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कहा है कि राज्य शासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राहत राशि बाढ़ पीड़ितों तक पहुँच ही जाए.
उन्होंने रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी के साथ सोमवार को बाढ़ पीड़ित इलाक़ों का दौरा किया.
रक्षा मंत्री मुखर्जी ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार बाढ़ पीड़ितों की हर संभव सहायता करेगी.
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुँचाने में लगे स्वयंसेवी संगठनों की एक बैठक बुलाई है.
बीबीसी के गुजरात संवाददाता राजीव खन्ना के अनुसार सोनिया गाँधी और प्रणव मुखर्जी ने बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित खेड़ा और आणंद ज़िलों का हवाई दौरा किया.
इसके बाद वे वड़ोदरा के कुछ बाढ़ प्रभावित इलाक़ों में गए.
सहायता राशि
सोनिया गाँधी ने वड़ोदरा में कहा कि राज्य शासन को सुनिश्चित करना चाहिए कि बाढ़ पीड़ितों के लिए जो राशि दी जा रही है वह उन तक पहुँचे.
उन्होंने कहा, "मुझे कई जगह ये शिकायतें मिली हैं कि बाढ़ पीड़ितों को दी जाने वाली राशि नहीं मिल रही है."
वे कई जगह रुक रुककर बाढ़ पीड़ितों से बात करती रहीं.
उधर रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि बाढ़ पीड़ित प्रति व्यक्ति को प्रतिदिन 15 रुपए देने का जो प्रावधान पाँच दिनों के लिए किया गया था उसे अब बढ़ाकर पंद्रह दिन कर दिया गया है.
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने गुजरात में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए 500 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है.
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने गुजरात के बाढ़ पीड़ितों को पाँच करोड़ की सहायता देने की घोषणा की है.
स्थिति सुधरी
पानी बरसना रुकने के बाद से राज्य में बाढ़ की स्थिति सुधर रही है.
बीबीसी संवाददाता के अनुसार शहरों में पानी उतरने के बाद राहत पहुँचाना आसान हुआ है. लेकिन गाँवों में पानी धीरे धीरे उतर रहा है और अब जाकर वहाँ संपर्क स्थापित हो रहा है.
इस बीच मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता में लगे स्वयंसेवी संगठनों की एक बैठक बुलाई है.
उल्लेखनीय है कि 21 जून से लगातार हो रही बारिश की वजह से गुजरात के बड़े हिस्से में बाढ़ आई थी जिसमें चार लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा.
इस बाढ़ में 132 लोगों की जानें गई हैं.
कई दिनों के बाद अहमदाबाद और वडोदरा के बीच एक्सप्रेस हाइवे (राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-8) को बसों और छोटे वाहनों के लिए खोल दिया गया है.
लेकिन खेड़ा और आणंद के गाँवों में अभी भी पानी भरा हुआ है और इन ज़िलों का एक बड़ा हिस्सा कटा हुआ है.
अधिकारियों का कहना है कि इन इलाक़ों में अभी भी सैकड़ों लोग फँसे हो सकते हैं.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि लोग अपना सामान और जानवरों को लेकर सड़कों के किनारे आ गए हैं क्योंकि वही एक जगह बची है जहाँ पानी नहीं है.