रविवार, 03 जुलाई, 2005 को 08:27 GMT तक के समाचार
महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से हटने की घोषणा करने के बाद नारायण राणे को शिवसेना से निष्कासित कर दिया गया है.
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने इसकी घोषणा करते हुए कहा है कि नए नेता का चयन उनका अधिकार है और वे जल्दी ही इसकी घोषणा करेंगे.
इससे पहले शिवसेना में अपनी उपेक्षा से नाराज़ नारायण राणे ने महाराष्ट्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफ़ा देने की घोषणा की थी.
इसके बाद शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने कहा है कि यदि नारायण राणे को आत्मसम्मान की इतनी ही चिंता है तो उन्हें विधायक का पद भी छोड़ देना चाहिए.
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके नारायण राणे और शिवसेना प्रमुख के बेटे उद्धव ठाकरे के बीच खींचतान की ख़बरें कई दिनों से आ रही थीं.
लेकिन शनिवार को यह अंतिम सिरे पर पहुँच गई जब नारायण राणे ने कहा कि जब पार्टी के किसी निर्णय से उन्हें अवगत ही नहीं करवाया जा रहा है और उन्हें दरकिनार कर दिया गया है.
इसके बाद रविवार को शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे ने विधायकों, महानगर पालिका के सदस्यों और अन्य नेताओं की एक बैठक ली और इसके बाद उन्होंने राणे को निकाले जाने की घोषणा कर दी.
उन्होंने कहा कि नारायण राणे ने उन्हें धोखा दिया है.
यह पूछे जाने पर कि ख़बरें हैं कि नारायण राणे के कुछ समर्थक भी इस्तीफ़ा देने की योजना बना रहे हैं, बाल ठाकरे ने कहा, "इससे कुछ फ़र्क नहीं पड़ता पहले भी ऐसा हुआ है, पार्टी शिव सैनिकों से चलती है एक-दो लोगों से नहीं."
23 साल की मेहनत
नारायण राणे, मनोहर जोशी की जगह पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे और नौ महीने तक इस पद पर रहे.
उन्हें शिवसेना का रिमोट कंट्रोल से संचालित मुख्यमंत्री कहा जाता था.
इसके बाद भाजपा और शिवसेना गठबंधन चुनाव हार गया और राणे विपक्ष के नेता बन गए. पिछले साल हुए चुनाव में एक बार और हार के बाद भी राणे विपक्ष के नेता बने रहे.
पार्टी से निष्कासन पर उन्होंने कहा कि पार्टी ने 23 सालों की मेहनत का यह फल दिया है.
उन्होंने दावा किया कि शिवसैनिकों का समर्थन अभी भी उनके साथ हैं.
नारायण राणे शिवसेना से निकाले जाने वाले तीसरे शीर्ष नेता हैं. इससे पहले छगन भुजबल और गणेश नाइक को पार्टी से निकाला गया था.
उल्लेखनीय है कि कुछ महीने पहले शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की नाराज़गी के बाद शिवसेना के सांसद रहे संजय निरुपम को भी पार्टी छोड़नी पड़ी थी.
निरुपम बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे.