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बुधवार, 29 जून, 2005 को 06:59 GMT तक के समाचार

'हेलीकॉप्टर शत्रु के हमले का निशाना'

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सेना ने स्वीकार किया है कि मंगलवार को जो हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, हो सकता है वह शत्रु के हमले से गिरा हो.

अमरीकी सेना ने कि शिनूक हेलीकॉप्टर पर 17 लोग सवार थे जिनकी तलाश के लिए बड़ा अभियान चलाया गया है.

यह हेलीकॉप्टर अफ़ग़ानिस्तान के पश्चिमी प्रांत कोनार के असदाबाद शहर के निकट गिर गया था.

तालेबान ने मंगलवार को दावा किया था कि यह हेलीकॉप्टर उसने मार गिराया था लेकिन अमरीका ने तालेबान के इन दावों पर कोई टिप्पणी नहीं की थी.

इस साल अफ़ग़ानिस्तान में दुर्घटनाग्रस्त होने वाला यह दूसरा अमरीकी शिनूक हेलीकॉप्टर था.

इससे पहले अप्रेल में शिनूक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें 18 लोगों की मौत हुई थी.

विद्रोहियों के दावे

दो इंजनों वाला शिनूक हेलीकॉप्टर पूर्वी हिस्से में पहले से मौजूद सैनिकों की मदद के लिए भेजा गया था. समझा जाता है कि उस इलाक़े में मौजूद सैनिकों को चरमपंथियों को ख़तरा था.

अमरीकी सेना का प्रवक्ता का कहना है कि जिस इलाक़े में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुआ वह काफ़ी दूरदराज़ का इलाक़ा है और वहाँ काफ़ी ऊँची-ऊँची पहाड़ियाँ हैं.

पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता एंड्रयू नोर्द का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह घटना पहले वाली दुर्घटना से "ज़्यादा गंभीर है". अप्रेल वाली दुर्घटना एक तूफ़ान के दौरान हुई थी.

अप्रेल में हुई दुर्घटना में जो जानी नुक़सान हुआ था वह 2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर हुए अमरीकी हमले के बाद से किसी एक घटना में सबसे बड़ा नुक़सान था.

कोनार प्रांत में अमरीकी सैनिकों पर अक्सर हमले होते रहते हैं.

तालेबान का प्रवक्ता होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बीबीसी से कहा कि उनके समर्थकों ने हेलीकॉप्टर को निशाना बनाया लेकिन इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.

इस व्यक्ति ने कहा कि उनके पास इस हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने और उसके बाद की वीडियो है.

तालेबान का ही प्रवक्ता होने का दावा करने वाले एक अन्य व्यक्ति ने दो अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों को फ़ोन करके इसी तरह का दावा किया.

इनमें से कम से कम एक एक टेलीफ़ोन तब किया गया जब अमरीकी सेना ने हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने की ख़बर भी जारी नहीं की थी.

पिछले तीन महीनों के दौरान अमरीकी नेतृत्व वाले सैनिकों और विद्रोहियों के बीच लड़ाई तेज़ हुई है.

अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई में 465 विद्रोही और 29 अमरीकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इनके अलावा 200 अफ़ग़ान नागरिक और सुरक्षा अधिकारियों की भी जान जा चुकी है.