बुधवार, 29 जून, 2005 को 08:24 GMT तक के समाचार
पिछले चार दिनों की लगातार बारिश ने गुजरात के दक्षिण हिस्सों में बाढ़ का ख़तरा पैदा कर दिया है.
गुजरात के चार ज़िलों के 25 हज़ार लोगों को बाढ़ के ख़तरे के कारण सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है.
इसके अलावा बारिश के बाद घरों के ढहने और बिजली का करंट लगने से कम-से-कम 30 लोग मारे भी गए हैं.
बीबीसी संवाददाता राजीव खन्ना के अनुसार गुजरात में पिछले चार दिनों से उत्तरी और दक्षिणी गुजरात के कुछ हिस्सों को छोड़कर सारे राज्य में बारिश हो रही है.
दक्षिणी गुजरात मे वडोदरा, सूरत और नवसारी तथा सौराष्ट्र क्षेत्र में सुरेंद्रनगर और अमरेली ज़िले सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं.
बारिश के कारण दो राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 574 सड़कें कई जगह टूट गई हैं.
तैयारी
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री आई के जडेजा ने कहा है कि किसी तरह की आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है.
उन्होंने कहा,"दक्षिणी गुजरात में सेना के जवान और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों को चौकस रखा गया है. वहीं दक्षिणी गुजरात और सौराष्ट्र क्षेत्र में राज्य की रिज़र्व पुलिस को भी सतर्क रहने को कहा गया है".
मंत्री ने बताया कि पानी के कम होने पर महामारी ना फैले इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन के टैबलेट बाँटे जा रहे हैं
उधर अहमदाबाद-मुंबई रेल मार्ग पर कुछ दिनों से रूका पड़ा यातायात फिर शुरू हो गया है.
हिमाचल की स्थिति
उधर हिमाचल प्रदेश में सतलुज नदी में आई बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ है.
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और गृह मंत्री शिवराज पाटिल हालात का जायजा लेने वहाँ के दौरे पर गए हैं.
सतलुज नदी में रविवार को अचानक जल स्तर बढ़ जाने के कारण दो सौ किलोमीटर तक नदी के किनारे रहने वाले हज़ारों लोगों को विस्थापित करना पड़ा था.
माना जा रहा है कि तिब्बत के पारचु झील में जल स्तर बढ़ जाने के कारण ही सतलुज का जलस्तर बढ़ा है.
इस बाढ़ के कारण देश के सबसे बड़े पनबिजली संयंत्र नाथपा-झाकरी संयंत्र को बंद कर देना पड़ा था.