http://www.bbcchindi.com

शुक्रवार, 24 जून, 2005 को 14:00 GMT तक के समाचार

जोनाथन केंट
बीबीसी न्यूज़, कुआलालंपुर

क्या हुआ मलेशिया में सूनामी राहत का

छह महीने पहले जब सूनामी की लहरों ने हिंद महासागर से सटे देशों में तबाही मचाई थी तो मलेशिया पर इसका सबसे कम प्रभाव पड़ा था.

मलेशिया में सिर्फ़ 68 लोगों की जान गई लेकिन छह महीने बाद भी सूनामी से प्रभावित मलेशिया के कुछ गांव अपने पैरों पर ठीक से खड़े नहीं हो सके हैं.

गांववालों का कहना है कि मदद मिलने में काफी देर हुई है कई लोग तो कह रहे हैं कि छह महीने बाद भी कोई मदद मिली ही नहीं है.

केदा ज़िले का कामपुंग सुंगई मुदा गांव बुरी तरह प्रभावित हुआ था जहां 12 लोग मरे थे.

पेशे से मछुआरे बदरुद्दीन बिन हामिद बताते हैं " जब सूनामी की लहरें आईं तो गांव में उत्सव मनाया जा रहा था.यह संपन्न गांव हुआ करता था. अब कुछ नहीं बचा है. "

आस पास के देशों की तुलना में मलेशिया के लोगों की स्थिति काफ़ी अच्छी मानी जा सकती है. यहां की प्रति व्यक्ति आय इंडोनेशिया से पांच गुना और श्रीलंका से चार गुना अधिक है.

इसके बावजूद मदद नहीं मिल पा रही है.

बदरुद्दीन कहते हैं कि उन्हें सरकार ने नाव के एवज़ में पर्याप्त धन देने का वादा किया था लेकिन बहुत कम रकम दी गई.

तबाह हो गए गांवों के स्थान पर बसाए गए शिविरों में हालात और भी ख़राब हैं. लोगों में रोष है.

गांव के मुखिया युसुफ अवांग कहते हैं कि जिस तरह के घरों में वो रह रहे हैं वो कभी भी गिर सकते हैं.

इन सभी लोगों को जल्दी ही स्थायी घर देने का आश्वासन दिया गया है.

यहीं से थोड़ी दूर मुदा गांव में अभी भी कई मछुआरे मदद मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं.

क़रीब 200 लोगों ने मदद के लिए याचिका दी थी लेकिन बहुत कम लोगों को ही मदद मिली है जबकि मलेशिया के लोगों ने अच्छा ख़ासा योगदान किया है.

मछुआरे अबू हसन कहते हैं " मेरी नाव टूट गई और घर भी तबाह हो गया. मुझे 6000 डालर देने का वादा किया गया वो भी रिण. रिण भी अभी तक नहीं मिला है. "

नौकरशाही

प्रभावित लोगों की मदद कर रही संस्थाओं का कहना है कि कई मामलों में सरकार को जानकारी ही नहीं है.

जब बीबीसी ने कई लोगों की शिकायतें सूनामी राहत के प्रभारी और उपप्रधानमंत्री नजीब रज़क के समक्ष रखीं तो उनका कहना था कि राहत सहायता ठीक ढंग से चल रही है.

रज़क ने कहा " आम तौर पर राहत सहायता ठीक रही है. लेकिन मैं ये मानता हूं कि कई लोग ऐसे हो सकते हैं जिन्हें उस तरह की मदद नहीं मिल सकी जैसी उनको उम्मीद थी. "

हालांकि अभी ये सवाल अनुत्तरित हैं कि मलेशिया के लोगों ने जो दान किया उस पैसे का या मदद का क्या हुआ.

मीडिया और मनोरंजन संबंधी अभियानों के ज़रिए ख़ासी रकम इकट्ठा कर के सरकार को दी गई थी लेकिन इस पैसे का क्या हुआ इस बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल रही है.