बुधवार, 22 जून, 2005 को 10:28 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश सरकार ने भिखारियों का सर्वेक्षण और पुनर्वास कराने का निर्णय किया है. फिलहाल शहरों और प्रमुख चौराहों से भिखारियों को हटाया जाएगा.
मुख्य सचिव नीरा यादव ने बताया कि मंगलवार को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल में यह फ़ैसला किया गया.
संवाददाताओं से बातचीत में नीरा यादव ने कहा,“भिखारी जगह-जगह पर शहरों में, चौराहों पर भीख माँगते हैं. कुछ अपराधी तत्व भी इनका इस्तेमाल करते हैं, इसलिए अपराध को भी बढ़ावा मिलता है.”
राज्य सरकार ज़िला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दे रही है कि “ऐसे भिखारियों को एक जगह जमा करें, उनकी गिनती करें और उनके पुनर्वास का प्रयास करें.”
जो भिखारी शारीरिक रूप से सक्षम होंगे उन्हें सरकार की विभिन्न निर्माण एजेंसियों में काम पर लगाया जाएगा.
सदुपयोग
नीरा यादव ने आगे कहा कि भिखारी भी समाज का एक हिस्सा हैं और इस बात की कोशिश होनी चाहिए कि उनका सही इस्तेमाल हो सके.
जो लोग शारीरिक विकलांगता के कारण भीख माँगने को विवश होते हैं सरकार उनके लिए विकलांग कल्याण विभाग के माध्यम से योजनाएं चलाएगी.
क़ानून में भीख माँगना वर्जित है. इसके बावजूद न केवल चौराहों, मंदिरों और रेल, बस स्टेशनों पर भी भिखारी दिखते हैं. कहा जाता है कि जेबकतरे और चोरों के गिरोह भी इनका इस्तेमाल करते हैं.
प्रमुख तीर्थ स्थलों बनारस, प्रयाग, अयोध्या आदि में भी बड़ी संख्या में भिखारी हैं और कई लोग इन्हें दान देना पुण्य समझते हैं.
कुछ भिखारी तो पारिवारिक विवशता के चलते इस धंधे में हैं, लेकिन एक बड़ा तबका पेशेवर है. इनके अपने परिवार और घर गृहस्थी होती है.
सौ-पचास रुपए के लिए दिन भर मज़दूरी करने के बजाय ये भीख माँगना और मौका मिलने पर दूसरों के माल पर हाथ साफ करना बेहतर समझते हैं.
राज्य सरकार समाज कल्याण विभाग के माध्यम से बूढ़ों, विकलांगों और भिखारियों के लिए संरक्षण गृह चलाती है. लेकिन ज़्यादातर भिक्षुक गृह खाली रहते हैं.
भिक्षुक गृहों में संसाधनों का अभाव होने से रहन-सहन की स्थिति बाहर से भी ख़राब होती है.
अब राज्य सरकार ने भिखारियों की समस्या पर नए ढंग से ध्यान दिया है, लेकिन अभी कोई ठोस कार्य योजना सामने नहीं आई है.