गुरुवार, 16 जून, 2005 को 14:08 GMT तक के समाचार
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत और पाकिस्तान शांति प्रक्रिया को लेकर मनमोहन सरकार की नीतियों पर गंभीर आपत्ति जताई है और कहा है कि हुर्रियत नेताओं की यात्रा से ठीक ढंग से नहीं निपटा गया.
इस संबंध में वाजपेयी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि हुर्रियत को जम्मू कश्मीर की लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार के मुक़ाबले अधिक प्रमुखता दी जा रही है.
वाजपेयी के पत्र जारी करते हुए भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने कहा कि यूपीए सरकार ने हुर्रियत नेताओं को पासपोर्ट देने के मामले को सही तरह से नहीं निपटाया.
वाजपेयी ने अपने पत्र में कहा है कि अथक प्रयास और सधी रणनीति अपनाते हुए पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई गई थी.
इसके तहत 6 जनवरी, 2004 को एक संयुक्त बयान भी जारी किया गया था.
वाजपेयी का कहना है कि ऐसा लगता है कि यह शांति प्रक्रिया अब कश्मीर केंद्रित होकर रह गई है. पाकिस्तान भी ऐसा ही चाहता था.
वाजपेयी ने अपने पत्र में कई मुद्दों को उठाया है. पहला तो यह कि सरकार ने हुर्रियत को जम्मू कश्मीर की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के समकक्ष खड़ा कर दिया है.
दूसरा पाकिस्तान को 6 जनवरी, 2004 के संयुक्त बयान से निकलने का मौक़ा दे दिया.
तीसरा यह है कि एक साल पहले उदारवादी और पाकिस्तान समर्थकों में साफ़ अंतर था लेकिन अब उदारवादी भी पाकिस्तान समर्थक हैं.
वाजपेयी का कहना है, '' भारतीय अधिकारियों ने हुर्रियत की पाकिस्तान यात्रा को सही तरीके से नहीं निपटाया. हुर्रियत नेताओं को भारतीय पासपोर्ट दिया जाना चाहिए था और उनसे अंतरराष्ट्रीय सीमा से पाकिस्तान में प्रवेश करने के लिए कहना था.''
वाजपेयी का कहना है कि इन कारणों से पाकिस्तान को कश्मीर को विवादास्पद क्षेत्र कहने का मौक़ा मिला.