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शुक्रवार, 10 जून, 2005 को 01:56 GMT तक के समाचार

नेतृत्व संकट पर भाजपा में विचार जारी

भारतीय जनता पार्टी में लालकृष्ण आडवाणी के अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने से उपजा नेतृत्व संकट अभी तक बना हुआ है.

स्थिति पर विचार के लिए आज शुक्रवार शाम को भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक होनी है.

ये बैठक गुरूवार को होनी थी जिसे ये कहते हुए अगले दिन के लिए स्थगित कर दिया गया कि इसराइल की यात्रा पर गए राज्यसभा में पार्टी के नेता जसवंत सिंह भी इस बैठक में शामिल होना चाहते हैं.

वैसे गुरुवार को पार्टी नेताओं के बीच देर रात तक विचार विमर्श जारी रहा लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल सका.

दिल्ली से बीबीसी संवाददाता रेहान फ़ज़ल के अनुसार गुरूवार को पहले ऐसा लगा था कि शायद बात सुलझ जाएगी और अगर भाजपा आडवाणी की पाकिस्तान यात्रा पर सकारात्मक रूख़ रखे तो शायद आडवाणी इस्तीफ़ा वापस लेने पर तैयार हो जाएँ.

लेकिन आडवाणी ये भी चाहते थे कि पार्टी जिन्ना के बारे में दिए गए उनके बयान पर भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दे, जिसे लेकर मतभेद शुरू हो गया.

पार्टी की कमान संभालने के लिए संभावित दावेदारों में शामिल पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने खुलकर आडवाणी के जिन्ना के बारे में दिए गए बयान का विरोध किया.

मुरली मनोहर जोशी ने कहा,"मैंने पार्टी नेताओं को बता दिया है कि कोई भी प्रस्ताव पारित हो उसमें मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष नहीं कहा जा सकता और विचारधारा पर भी कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा".

प्रतिक्रियाएँ

रेहान फ़ज़ल के अनुसार आडवाणी के करीबी समझे जानेवाले किसी भी बड़े नेता ने अभी तक खुलकर विवादास्पद बयान के बारे में आडवाणी का साथ नहीं दिया है.

अलबत्ता जसवंत सिंह ने विदेश से एक वक्तव्य जारी कर आडवाणी का समर्थन किया.

उधर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपने पुराने रूख़ पर कायम है कि विचारधारा के स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता.

मगर भारतीय जनता पार्टी के कुछ सहयोगी दलों ने आडवाणी के पक्ष में बयान दिए हैं.

जनता दल युनाईटेड ने एक प्रस्ताव पारित कर आडवाणी के बयान का समर्थन किया है.

पार्टी नेता नीतिश कुमार ने पत्रकारों से कहा,"आडवाणी जी ने जो भी कहा सही कहा. हमें उनके बयान को सही संदर्भ में देखना चाहिए".

वहीं तेलुगू देशम नेता चंद्रबाबू नायडू ने कहा है कि आडवाणी के पाकिस्तान में दिए गए बयान में कुछ भी ग़लत नहीं था और इसका स्वागत किया जाना चाहिए.