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बुधवार, 08 जून, 2005 को 07:12 GMT तक के समाचार

आडवाणी अपने इस्तीफ़े पर क़ायम

लालकृष्ण आडवाणी ने एक बार फिर अपना इस्तीफ़ा वापस लेने से इनकार कर दिया है.

इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी सहित अन्य नेताओं ने जिस तरह उन्हें मनाने की कोशिश की उसके लिए उन्होंने आभार जताया है.

वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुँचे थे और इस मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे.

उधर पार्टी पदाधिकारियों और संसदीय दल की बुधवार शाम एक बैठक होने जा रही है जिसमें आडवाणी के इस्तीफ़े पर विचार किया जाएगा.

आडवाणी भाजपा संसदीय दल के नेता और संसद में विपक्ष के नेता भी हैं, अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे विपक्ष के नेता के पद से भी त्यागपत्र देंगे या नहीं.

उल्लेखनीय है कि आडवाणी ने अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष कहने के बयान के बाद भारत में हिंदूवादी संगठनों द्वारा की गई आलोचना के बाद मंगलवार को अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया था.

मुलाक़ात

लालकृष्ण आडवाणी अपनी पाकिस्तान यात्रा का ब्यौरा देने के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलने पहुँचे थे.

थोड़ी देर की मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि वे इस्तीफ़ा वापस नहीं ले रहे हैं.

अपने पाकिस्तान दोरे के बारे में आडवाणी ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को अपने आकलन से अवगत करा दिया और द्विपक्षीय वार्ता में सुधार को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं.

उन्होंने अपनी पाकिस्तान यात्रा को सफल बताया.

प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू के अनुसार आडवाणी ने प्रधानमंत्री को परवेज़ मुशर्रफ़ और शौकत अज़ीज़ से हुई मुलाक़ात का ब्यौरा दिया है.

उत्तराधिकारी

इस समय दिल्ली में आडवाणी के उत्तराधिकारी के नाम पर भी अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं.

हालांकि वेंकैया नायडू को फ़िलहाल कामकाज देखने के लिए कहा गया है लेकिन पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने साफ़ कर दिया है कि नायडू कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बनाए गए हैं.

इस बीच आडवाणी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद बीजेपी के अध्यक्ष पद के लिए कई नेताओं के नामों पर अटकलें लग रही हैं.

इनमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज तथा पार्टी के पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू के नाम चल रहे हैं.

वैसे पार्टी के अध्यक्ष रह चुके मुरली मनोहर जोशी और उपाध्यक्ष बाल आप्टे के नाम भी लिए जा रहे हैं लेकिन वे आरएसएस के उस फ़ार्मूले में फिट नहीं बैठते जिसमें युवा नेतृत्व की बात कही गई थी.

पार्टी पदाधिकारियों की ओर से कहा गया है कि अगर आडवाणी का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया गया तो इस समय पार्टी के अध्यक्ष की नियुक्ति तो तत्काल संभव नहीं होगी लेकिन एक कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जा सकता है.